निवाड़ी जिले में सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सभी को झकझोर दिया। बड़े तालाब के पास सड़क किनारे खड़े ट्रॉले में पीछे से तेज रफ्तार डंपर जा घुसा। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई और डंपर के केबिन में फंसे ड्राइवर और क्लीनर जिंदा जल गए। लपटें इतनी तेज थीं कि दूर से ही आग का धुआं और रोशनी दिखाई दे रही थी।
हादसा रात करीब 12:30 बजे हुआ, जब डंपर सड़क किनारे खड़े ट्रॉले से टकरा गया। टक्कर के बाद डंपर में आग लग गई और कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे केबिन को अपनी चपेट में ले लिया। अंदर फंसे ड्राइवर और क्लीनर बाहर निकलने का कोई मौका नहीं पा सके।

मृतकों की पहचान 32 वर्षीय राजा अहिरवार और गोपाल अहिरवार के रूप में हुई है। दोनों दमोह जिले के बटियागढ़ क्षेत्र के चैनपुरा नरसिंहगढ़ गांव के निवासी थे। हादसे के बाद दोनों के शव बुरी तरह जल गए, जिन्हें पहचानना भी मुश्किल हो गया था।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। आग इतनी भयानक थी कि उसे बुझाने के लिए चार दमकल गाड़ियों को लगाया गया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इसके बाद क्रेन की मदद से डंपर के केबिन को काटकर अंदर फंसे दोनों लोगों के शव बाहर निकाले गए।
पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया हादसे का कारण ट्रॉला चालक की लापरवाही सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ट्रॉला सड़क किनारे बिना किसी चेतावनी संकेत या लाइट के खड़ा था, जिसके कारण पीछे से आ रहे डंपर चालक को उसका अंदाजा नहीं लग पाया और यह हादसा हो गया।
एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि डंपर में सीमेंट निर्माण में उपयोग होने वाली राख भरी हुई थी। टक्कर के बाद यह राख सड़क पर फैल गई, जिससे आग तेजी से फैल गई और स्थिति और भयावह हो गई।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने तत्काल यातायात को नियंत्रित किया और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ट्रॉला चालक की तलाश की जा रही है।
इस हादसे ने दो परिवारों को गहरे शोक में डाल दिया है। मृतक राजा अहिरवार के परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा हैं, जिनका अब सहारा छिन गया है। वहीं गोपाल अहिरवार की दो बेटियां हैं, जिनकी मां का पहले ही निधन हो चुका है। अब उनके सिर से पिता का साया भी उठ गया है, जिससे परिवार पूरी तरह टूट गया है।

गांव के लोगों के अनुसार, गोपाल की बेटियां अभी छोटी हैं और उनका पालन-पोषण अब बुजुर्ग दादा-दादी के भरोसे है। वहीं राजा के बच्चों की जिम्मेदारी भी अब परिवार के अन्य सदस्यों पर आ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हादसे अक्सर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण होते हैं। सड़क किनारे खड़े वाहनों पर रिफ्लेक्टर या चेतावनी लाइट का होना जरूरी है, ताकि दूर से आने वाले वाहन चालकों को सतर्क किया जा सके।
फिलहाल दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है, जहां परिजनों के आने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
यह हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।