केन-बेतवा परियोजना के विरोध में उग्र हुआ ‘चिता आंदोलन’, चिताओं पर लेटे ग्रामीण और महिलाएं !

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छतरपुर। छतरपुर और पन्ना जिले की सीमा पर स्थित धोड़न डैम क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा ‘चिता आंदोलन’ अब उग्र रूप लेता जा रहा है। परियोजना के तहत अधिग्रहित की जा रही जमीन के विरोध में सैकड़ों ग्रामीण, आदिवासी महिलाएं और बच्चे सांकेतिक चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग उनके नेता अमित भटनागर की रिहाई और विस्थापितों के अधिकारों की सुरक्षा है। आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा और क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

धोड़न डैम स्थल पर शनिवार से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक परियोजना का विरोध नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व, पहचान और जल-जंगल-जमीन बचाने की लड़ाई है। आंदोलनकारी स्पष्ट कह रहे हैं कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

चिताओं पर लेटी महिलाएं और बच्चे

आंदोलन के तीसरे दिन सोमवार को बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों के साथ सांकेतिक चिताओं पर लेटी नजर आईं। यह दृश्य आंदोलन की गंभीरता और ग्रामीणों की पीड़ा को दर्शा रहा था। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने अपने शरीर पर सफेद कपड़े ओढ़ रखे थे और कई लोग चिताओं के आसपास बैठकर मौन सत्याग्रह कर रहे थे।

ग्रामीणों का कहना है कि बांध परियोजना के कारण उनके गांव, खेत, जंगल और जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाएंगे। उनका आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर उन्हें उनकी जमीनों से बेदखल कर रही है, जबकि विस्थापन और पुनर्वास को लेकर अब तक स्पष्ट और संतोषजनक व्यवस्था नहीं की गई है।

महिलाओं ने कहा कि उनके परिवार पीढ़ियों से इन जंगलों और जमीनों पर निर्भर हैं। यदि यह जमीन चली गई तो उनका जीवन संकट में पड़ जाएगा। कई महिलाओं ने कहा कि वे अपने बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए आंदोलन कर रही हैं और जरूरत पड़ी तो अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगी।

अमित भटनागर की रिहाई की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग आंदोलन से जुड़े नेता अमित भटनागर की तत्काल रिहाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से उन्हें हिरासत में लिया है। प्रदर्शन स्थल पर लगातार “अमित भटनागर को रिहा करो” और “हमें न्याय दो” जैसे नारे गूंजते रहे।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दिव्या अहिरवार ने कहा कि प्रशासन ग्रामीणों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लोग डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब तक विस्थापित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा और उनके अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश

आंदोलनकारियों में प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर भी भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक कोई वरिष्ठ अधिकारी आंदोलन स्थल पर उनकी बात सुनने नहीं पहुंचा। इससे लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

दूर-दराज के गांवों से हजारों आदिवासी और ग्रामीण पैदल चलकर आंदोलन स्थल पहुंच रहे हैं। कई गांवों से महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। आंदोलन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखे हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार विकास की योजनाएं तो बना रही है, लेकिन प्रभावित लोगों की भावनाओं और जीवन पर पड़ने वाले असर को नजरअंदाज कर रही है। उनका आरोप है कि परियोजना से जुड़े सर्वे और अधिग्रहण प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई।

जीतू पटवारी का दौरा

इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार 12 मई को धोड़न बांध स्थल पहुंचेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे 11 मई की रात खजुराहो पहुंचेंगे और अगले दिन सुबह बमीठा तथा रनगुवा होते हुए आंदोलन स्थल का दौरा करेंगे।

बताया जा रहा है कि जीतू पटवारी विस्थापित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और आंदोलनकारियों को समर्थन देंगे। कांग्रेस ने कहा है कि वह आदिवासियों और विस्थापितों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाएगी।

जल, जंगल और जमीन की लड़ाई

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल एक बांध परियोजना का विरोध नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन उनके जीवन का आधार हैं और इन्हें बचाने के लिए वे किसी भी प्रकार का बलिदान देने को तैयार हैं।

आंदोलन स्थल पर लगातार नारेबाजी हो रही है और लोग सांकेतिक चिताओं पर लेटकर यह संदेश दे रहे हैं कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया तो वे अपने अधिकारों के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे।

फिलहाल धोड़न डैम क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, जबकि आंदोलनकारी अपने संघर्ष को और तेज करने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

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