3 लाख से अधिक किसानों से 12.94 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी, 1333 करोड़ से ज्यादा का भुगतान
गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गेहूँ उपार्जन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। अब तक प्रदेश में 3 लाख 5 हजार 422 किसानों से 12 लाख 94 हजार 497 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार किसानों की उपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है।
मंत्री ने बताया कि खरीदी के साथ-साथ भुगतान की प्रक्रिया भी तेज़ी से संचालित की जा रही है। अब तक एक लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में 1333 करोड़ 30 लाख रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे किसानों को उनकी उपज का समय पर उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
किसानों की बढ़ती संख्या और उपज को ध्यान में रखते हुए स्लॉट बुकिंग व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले प्रति उपार्जन केंद्र प्रतिदिन 1000 क्विंटल गेहूँ विक्रय की अनुमति थी, जिसे बढ़ाकर पहले 1500 क्विंटल किया गया और अब इसे और बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन प्रति केंद्र कर दिया गया है। इस निर्णय से अधिक किसानों को कम समय में अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया में तेजी आएगी।

इसके अलावा, उपार्जन केंद्रों की संख्या भी पर्याप्त रखी गई है। पूरे प्रदेश में 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों को गेहूँ विक्रय की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है, जिससे तुलाई की प्रक्रिया तेज़ और सुगम हो सके।
मंत्री ने यह भी बताया कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए छायादार बैठने की व्यवस्था, पेयजल, बारदाने, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की सफाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इन व्यवस्थाओं से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
समर्थन मूल्य के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि इस वर्ष गेहूँ की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी जोड़ा गया है। इस प्रकार किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है, जो उनके लिए एक लाभकारी मूल्य है।
भंडारण और परिवहन की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक खरीदे गए गेहूँ में से 9 लाख 69 हजार 615 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। इसके लिए जूट बारदाने, पीपी और एचडीपी बैग का उपयोग किया जा रहा है, ताकि अनाज सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जा सके।
इस वर्ष गेहूँ उपार्जन के लिए रिकॉर्ड पंजीयन भी दर्ज किया गया है। कुल 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। यह बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि किसान सरकार की नीतियों पर भरोसा जता रहे हैं।
पिछले वर्ष लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की गई थी, जबकि इस वर्ष 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सरकार द्वारा लक्ष्य में वृद्धि करना किसानों के हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, गेहूँ उपार्जन व्यवस्था में किए गए ये सुधार किसानों के लिए राहत और सुविधा दोनों लेकर आए हैं। स्लॉट बुकिंग क्षमता में वृद्धि, भुगतान की गति, और बेहतर व्यवस्थाओं के माध्यम से सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य समय पर मिल सके और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।