डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के नरयावली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों और योजनाओं की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों और आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रशंसा करते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन समूहों को और अधिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो सके।

कृषि क्षेत्र में नवाचारों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती न केवल भूमि की उर्वरता बनाए रखती है, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक लाभ भी प्रदान करती है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने की अपील की, जिससे नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके और वायु प्रदूषण में भी कमी लाई जा सके।
प्रदर्शनी के दौरान मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के स्टॉल का भी भ्रमण किया, जहां उन्होंने प्रसिद्ध शरबती गेहूं का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने हरे चने की नई किस्म आरवीजी-205 के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस किस्म की विशेषता यह है कि इसका दाना सूखने के बाद भी हरा रहता है और स्वाद भी हरे चने जैसा ही बना रहता है। यह किस्म फूला और बर्फी जैसे उत्पादों के लिए उपयुक्त होने के साथ-साथ पोषक तत्वों—प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फास्फोरस और मैग्नीशियम—से भरपूर है।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को पूसा बायोडीकंपोजर के माध्यम से पराली और नरवाई प्रबंधन की जानकारी भी दी। इस तकनीक से पर्यावरण संरक्षण के साथ जैविक खाद का निर्माण संभव है। साथ ही नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उर्वरकों के उपयोग से लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि के बारे में भी अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री ने इन सभी नवाचारों को सराहनीय बताते हुए इनके व्यापक उपयोग पर बल दिया।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, केन-बेतवा लिंक परियोजना, मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, बण्डा वृहद सिंचाई परियोजना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना, एक जिला एक उत्पाद योजना और समग्र शिक्षा अभियान से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए, ताकि सरकार की मंशा के अनुरूप समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
कुल मिलाकर, नरयावली में आयोजित यह प्रदर्शनी केवल योजनाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि नवाचार, आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत संदेश थी। मुख्यमंत्री का यह दौरा किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए नई प्रेरणा लेकर आया है, जो क्षेत्रीय विकास को नई गति देने में सहायक सिद्ध हो सकता है।