छतरपुर जिले के हरपालपुर क्षेत्र में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से दो नाबालिग गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया, वहीं परिजनों में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
गमी में आए थे, हादसे का शिकार बन गए
जानकारी के अनुसार, 16 वर्षीय साहिल और 17 वर्षीय शानू अपने रिश्तेदार के यहां गमी में शामिल होने के लिए हरपालपुर आए हुए थे। सुबह के समय दोनों किसी काम से वार्ड नंबर 10 स्थित कालका मैरिज हाउस के पीछे एक मकान के पास पहुंचे। इसी दौरान मकान के ऊपर से गुजर रही 11 केवी की हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आने से वे करंट की चपेट में आ गए।
करंट लगते ही दोनों युवक बुरी तरह झुलस गए और मौके पर ही गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें देखा और परिजनों को सूचना दी।

स्थानीय लोगों ने बचाई जान
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग और परिजन मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए दोनों घायलों को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन दोनों की हालत बेहद नाजुक होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
फिलहाल दोनों का इलाज झांसी में जारी है, जहां डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
बिजली विभाग पर गंभीर आरोप
इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां से गुजर रही हाईटेंशन लाइन लंबे समय से खतरा बनी हुई थी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई बार संबंधित अधिकारियों से इस लाइन को हटाने या सुरक्षित करने की मांग की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
रिहायशी इलाकों में खतरा बनी हाईटेंशन लाइनें
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि रिहायशी इलाकों में गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनें कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां बच्चे और आम लोग रोजाना आवाजाही करते हैं, वहां सुरक्षा मानकों का पालन न होना बड़े हादसों को न्योता देता है।

कार्रवाई की उठी मांग
घटना के बाद क्षेत्रवासियों में आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शहर और गांवों में जहां-जहां इस तरह की खतरनाक लाइनें गुजर रही हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए या सुरक्षित किया जाए।
छतरपुर का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का परिणाम माना जा रहा है। दो मासूम जिंदगी गंभीर हालत में अस्पताल में जूझ रही हैं, और सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी घटनाओं से सबक कब लिया जाएगा।
यदि समय रहते सुरक्षा उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। फिलहाल सभी की नजर घायलों की हालत पर टिकी है और लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।