जबलपुर में सूदखोरों की प्रताड़ना से परेशान नमक कारोबारी ने खाया जहर, हालत गंभीर; परिवार ने लगाए गंभीर आरोप !

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जबलपुर में सूदखोरी के दबाव और लगातार मिल रही धमकियों से परेशान एक व्यापारी द्वारा जहर खाने का गंभीर मामला सामने आया है। नमक और रियल एस्टेट कारोबारी शरद मोर को गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद परिवार में हड़कंप मच गया है और पुलिस को शिकायत दी गई है।

लगातार बढ़ते कर्ज और 20% मासिक ब्याज का दबाव

परिजनों के अनुसार, शरद मोर ने व्यापार विस्तार के लिए कुछ लोगों से कर्ज लिया था। आरोप है कि उन पर हर महीने करीब 20 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला जा रहा था, इसके बावजूद मूलधन लगातार बढ़ता ही जा रहा था और कम नहीं हो रहा था।

परिवार का कहना है कि ब्याज और मूलधन दोनों का भुगतान समय पर करने के बावजूद सूदखोर लगातार दबाव बना रहे थे और धमकियां दे रहे थे।

रात को घर से निकले, गोलबाजार में अचेत मिले

रविवार रात शरद मोर घर से निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटे। इसके बाद उनके बेटे प्रांजल ने उनकी तलाश शुरू की।

कुछ देर बाद वे गोलबाजार क्षेत्र में अचेत अवस्था में पड़े मिले। पास ही जहर की एक खाली शीशी भी पाई गई। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

पहले भी हो चुका था हमला, चाकू से हमला करने का आरोप

परिजनों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। सितंबर 2025 में भी सूदखोरी के विवाद को लेकर उन पर हमला किया गया था, जिसमें उन्हें चाकू मारे जाने का आरोप है।

परिवार का कहना है कि उस समय पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जमीन एग्रीमेंट और धमकियों के आरोप

परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने उनसे जमीन का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी करवा लिया था। इसके साथ ही फोन पर लगातार धमकियां दी जा रही थीं, जिससे व्यापारी मानसिक रूप से काफी परेशान थे।

पत्नी और बेटे ने लगाए गंभीर आरोप

शरद मोर की पत्नी ने आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय से मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। वहीं बेटे अंशुल और प्रांजल का कहना है कि पिता पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था और सूदखोर उन्हें बर्बाद करने की धमकी दे रहे थे।

परिवार का कहना है कि व्यापार के लिए लिया गया कर्ज उन्होंने समय पर चुकाया, लेकिन फिर भी उत्पीड़न बंद नहीं हुआ।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि पहले दी गई शिकायतों पर पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों के हौसले बढ़ते गए।

इस मामले में लार्डगंज थाना पुलिस का कहना है कि व्यापारी के होश में आने के बाद उनका बयान दर्ज किया जाएगा और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल में हालत गंभीर

फिलहाल शरद मोर का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है और डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।

यह मामला एक बार फिर सूदखोरी और अवैध ब्याज वसूली की गंभीर समस्या को उजागर करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि छोटे व्यापारियों की सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था पर भी बड़ा संकट दिखाता है।

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