शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना के तहत टीकमगढ़ में चल रहे आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में रविवार को भोजन की गुणवत्ता को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। सैन्य बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती की तैयारी कर रहे प्रशिक्षुओं ने नाश्ता और खाने की खराब गुणवत्ता पर नाराजगी जताई। इस दौरान प्रशिक्षुओं और भोजन बनाने वाले कर्मचारियों के बीच कहासुनी भी हो गई।
जानकारी के अनुसार टीकमगढ़ के ढोंगा मैदान के पास स्थित हॉस्टल में अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां करीब 70 लड़कों और 30 लड़कियों को ठहराया गया है। दो दिन पहले ही योजना का शुभारंभ हुआ था और युवाओं को सेना, पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती के लिए शारीरिक एवं अन्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रविवार सुबह प्रशिक्षण केंद्र में मौजूद लड़कों ने नाश्ते और भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि उन्हें समय पर भोजन नहीं मिल रहा और जो खाना दिया जा रहा है उसकी गुणवत्ता भी बेहद खराब है। युवाओं का कहना है कि सुबह कड़ी शारीरिक कसरत के बाद उन्हें पौष्टिक नाश्ता मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।

प्रशिक्षणार्थी राजेंद्र लोधी ने बताया कि योजना शुरू होने के बाद से अब तक कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि निरीक्षण करने नहीं आया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं की निगरानी नहीं होने के कारण भोजन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि जब उन्होंने खाने की शिकायत की तो भोजन बनाने वाले कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार किया।
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें प्रशिक्षु भोजन और व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कुछ युवक भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए बहस करते नजर आ रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर भोजन बनाने वाले कर्मचारियों ने भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि कुछ प्रशिक्षु सुबह से ही नाश्ते और खाने को लेकर गाली-गलौज कर रहे थे, जिसके कारण विवाद बढ़ गया। कर्मचारियों का कहना है कि वे तय व्यवस्था के अनुसार भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक प्रशिक्षणार्थियों को आजीविका मिशन भवन स्थित सामुदायिक प्रशिक्षण केंद्र ढोंगा में ठहराया गया है। यहां युवाओं के रहने, भोजन और प्रशिक्षण की व्यवस्था शासन की ओर से की गई है।
इस मामले में पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी राघव पटसारिया ने बताया कि शासन द्वारा प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए नाश्ता और दोनों समय के भोजन हेतु प्रतिदिन 110 रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सभी लड़के और लड़कियों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

राघव पटसारिया ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रशिक्षु को भोजन या अन्य व्यवस्था को लेकर शिकायत है तो उसका समाधान किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि भोजन की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
घटना के बाद प्रशिक्षण केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रशिक्षुओं का कहना है कि यदि उन्हें बेहतर भोजन और सुविधाएं मिलेंगी तभी वे पूरी क्षमता के साथ प्रशिक्षण ले पाएंगे।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सैन्य और सुरक्षा बलों की तैयारी कर रहे युवाओं के स्वास्थ्य और पोषण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को बेहतर भविष्य देना है, इसलिए व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग मामले को शांत कराने और शिकायतों के समाधान की बात कह रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशिक्षुओं की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है और भोजन व्यवस्था में कितना सुधार होता है।