चकबैना गांव में एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांव के 30 वर्षीय युवक रोहित जाटव ने शनिवार शाम अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रोहित एमबीए तक पढ़ा-लिखा था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन लंबे समय से नौकरी नहीं मिलने और मानसिक तनाव के कारण उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। परिवार का कहना है कि बेरोजगारी की वजह से वह लगातार तनाव में रहने लगा था और धीरे-धीरे शराब की लत का शिकार हो गया था।
घटना लाच थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चकबैना गांव की है। शनिवार को गांव में वट पूजन का कार्यक्रम था, जिसमें परिवार की महिलाएं और अन्य सदस्य शामिल होने गए थे। घर में रोहित अकेला था। इसी दौरान उसने घर के ऊपर बने कमरे में साड़ी का फंदा बनाकर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली।
मां और पत्नी ने देखा दर्दनाक मंजर
शाम करीब 6 बजे जब रोहित की मां और पत्नी पूजन कार्यक्रम से वापस घर लौटीं तो उन्होंने ऊपर वाले कमरे का दरवाजा बंद देखा। काफी आवाज लगाने के बाद भी जब अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो परिजनों को शक हुआ। दरवाजा खोलकर देखा गया तो रोहित का शव पंखे से लटका हुआ था।

यह दृश्य देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां बदहवास होकर रोने लगीं, जबकि पत्नी की हालत भी बिगड़ गई। आसपास के लोग और पड़ोसी मौके पर पहुंच गए। गांव में देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई।
सूचना मिलने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस की लाच थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर अस्पताल भेजा। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पढ़ाई में होशियार था रोहित
मृतक के पिता देवीलाल जाटव ने बताया कि रोहित बचपन से पढ़ाई में अच्छा था। परिवार ने मेहनत करके उसे पढ़ाया और उसने एमबीए तक की पढ़ाई पूरी की। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे अच्छी नौकरी मिलेगी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद भी रोहित को स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी। कई जगह आवेदन करने और इंटरव्यू देने के बावजूद सफलता नहीं मिलने से वह धीरे-धीरे निराश रहने लगा। परिवार के अनुसार नौकरी न मिलने की चिंता उसे अंदर ही अंदर तोड़ रही थी।
बेरोजगारी के साथ शराब की लत
परिजनों ने बताया कि मानसिक तनाव के चलते रोहित को शराब पीने की आदत लग गई थी। शुरू में उसने कभी-कभार शराब पीना शुरू किया, लेकिन बाद में यह आदत बढ़ती चली गई। परिवार कई बार उसे समझाता था, लेकिन वह तनाव में रहने लगा था।
हालांकि परिवार का कहना है कि रोहित का स्वभाव शांत था। उसका गांव या परिवार में किसी से कोई विवाद नहीं था। वह अक्सर चुपचाप रहता था और अपनी परेशानियां किसी से खुलकर साझा नहीं करता था।
ग्रामीणों का कहना है कि रोहित पढ़ा-लिखा और समझदार युवक था। गांव के लोग भी उसकी मौत से स्तब्ध हैं। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि इतना पढ़ा-लिखा युवक इस तरह जिंदगी से हार मान लेगा।
पत्नी और दो मासूम बेटियों का सहारा छिना
रोहित अपने पीछे पत्नी और दो छोटी बच्चियों को छोड़ गया है। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी बार-बार यही कह रही थी कि अगर रोहित अपनी परेशानी बता देता तो शायद परिवार मिलकर कोई रास्ता निकाल लेता।
मासूम बच्चियां अभी इतनी छोटी हैं कि उन्हें पूरी तरह समझ भी नहीं है कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। गांव की महिलाओं ने परिवार को संभालने की कोशिश की, लेकिन घर का माहौल पूरी तरह गमगीन बना रहा।
गांव में पसरा मातम
घटना के बाद पूरे चकबैना गांव में शोक का माहौल है। रविवार को जब पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हर कोई यही चर्चा करता नजर आया कि बढ़ती बेरोजगारी और मानसिक तनाव युवाओं को किस हद तक तोड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी जब युवाओं को रोजगार नहीं मिलता तो वे मानसिक रूप से कमजोर पड़ने लगते हैं। ऐसे मामलों में परिवार और समाज को युवाओं का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है।
पुलिस जांच में जुटी
मध्य प्रदेश पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। फिलहाल परिजनों और आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभी तक किसी प्रकार की साजिश या विवाद जैसी बात सामने नहीं आई है।
बेरोजगारी और मानसिक तनाव बना बड़ी चुनौती
रोहित की मौत ने एक बार फिर युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और बेरोजगारी के मुद्दे को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक रोजगार न मिलने से कई युवा अवसाद और तनाव का शिकार हो जाते हैं।
आज के समय में सिर्फ पढ़ाई पूरी कर लेना ही पर्याप्त नहीं रह गया है। प्रतियोगिता और आर्थिक दबाव के कारण युवा लगातार मानसिक दबाव में रहते हैं। यदि समय रहते परिवार और समाज उनका साथ न दे तो कई बार हालात दुखद मोड़ ले लेते हैं।
दतिया के चकबैना गांव की यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल भी है—क्या हमारे युवा बढ़ते तनाव और बेरोजगारी से जूझते हुए धीरे-धीरे उम्मीद खोते जा रहे हैं |