डिग्री के साथ व्यक्तित्व विकास और अभिव्यक्ति ही सफलता की कुंजी: ‘दीक्षा-सार’ कार्यक्रम में मिला भविष्य का मार्गदर्शन !

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आज के प्रतिस्पर्धी युग में केवल शैक्षणिक ज्ञान ही सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि सही अभिव्यक्ति, व्यक्तित्व विकास और निरंतर अभ्यास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य को लेकर शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय, सागर में बीए तृतीय वर्ष की परीक्षाओं के पश्चात राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा ‘दीक्षा-सार’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्गदर्शन देना और परीक्षा के बाद उत्पन्न मानसिक दबाव को कम करना था।

कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के निर्देशन में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में शासकीय महाविद्यालय ढाना की प्राचार्य डॉ. ज्योति मार्टिन उपस्थित रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. प्रतिभा जैन ने की। विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. संदीप सबलोक ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर लगभग 350 छात्र-छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित मानसिक स्वास्थ्य एवं गतिविधियां कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में भविष्य और परीक्षाओं को लेकर बढ़ते तनाव को कम करना था। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक दिशा दी, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को भी समझाया।

मुख्य अतिथि डॉ. ज्योति मार्टिन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कॉलेज के तीन वर्ष केवल डिग्री प्राप्त करने का समय नहीं होते, बल्कि यह स्वयं को विकसित करने का एक सुनहरा अवसर होता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अर्जित अनुभव ही उनके भविष्य की नींव बनता है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि साक्षात्कार के दौरान अभिव्यक्ति की शैली और व्यक्तित्व का प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. प्रतिभा जैन ने विद्यार्थियों को भावुक विदाई देते हुए जीवन में लक्ष्य की स्पष्टता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट उद्देश्य होना अत्यंत आवश्यक है। यदि विद्यार्थी अपने मार्ग से भटक जाते हैं, तो सफलता उनसे दूर हो जाती है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्नातकोत्तर में विषय चयन को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि महाविद्यालय सदैव उनके मार्गदर्शन के लिए तत्पर रहेगा।

विशिष्ट वक्ता डॉ. संदीप सबलोक ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि आज का दौर केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सही अभिव्यक्ति और निरंतर अभ्यास का युग है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि प्रतिस्पर्धा के इस समय में केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि स्वयं को मानसिक और बौद्धिक रूप से मजबूत बनाना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ही उन्हें एक सफल अधिकारी और जिम्मेदार नागरिक बना सकता है।

डॉ. सबलोक ने यह भी कहा कि स्नातक के बाद का समय जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है, जहां से एक नई दिशा और व्यापक अवसरों का मार्ग खुलता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें और उन्हें निखारने के लिए निरंतर प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि अनुभव और अभिव्यक्ति ही सफलता की असली कुंजी है।

कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन जयपाल सिंह राजपूत द्वारा किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन को सफल बनाने में शोधार्थी अंकेश कुलस्ते और अनुज अहिरवार का विशेष योगदान रहा।

समापन के अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ‘दीक्षा-सार’ कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि यह उनके जीवन की नई दिशा तय करने में भी सहायक सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज के युग में सफलता पाने के लिए केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, स्पष्ट लक्ष्य, सही अभिव्यक्ति और निरंतर अभ्यास आवश्यक हैं।

इस प्रकार, ‘दीक्षा-सार’ कार्यक्रम विद्यार्थियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जिसने उन्हें अपने भविष्य को लेकर जागरूक और आत्मविश्वासी बनाया।

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