इंदौर। शहर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान डेली कॉलेज में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के गठन को लेकर चुनावी प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। बुधवार को नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि पूरी होने के साथ ही चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। इस बार कुल 11 उम्मीदवारों ने दो अलग-अलग श्रेणियों में अपनी दावेदारी पेश की है।
कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, चुनाव दो प्रमुख श्रेणियों—‘फाउंडर डोनर’ और ‘न्यू डोनर’—में आयोजित किए जा रहे हैं। ‘फाउंडर डोनर’ श्रेणी, जिसमें परंपरागत रूप से पुराने दानदाता और राजघराने से जुड़े सदस्य आते हैं, उसमें 4 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं ‘न्यू डोनर’ श्रेणी, जिसमें नए दानदाता शामिल हैं, उसमें 7 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है।
नामांकन के बाद अब जांच और अंतिम सूची
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 2 मई को सभी नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) की जाएगी। इसके बाद 3 मई को उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-कौन से प्रत्याशी चुनावी मैदान में बने रहेंगे और कितने नामांकन खारिज होते हैं या वापस लिए जाते हैं।

फाउंडर डोनर श्रेणी में कड़ा मुकाबला
फाउंडर डोनर श्रेणी में दो पदों के लिए चार दावेदार मैदान में हैं। इनमें वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष विक्रमसिंह पंवार, सदस्य प्रियव्रत सिंह खिलचीपुर, नरेन्द्रसिंह बिडवाल और अनिरुद्ध सिंह दोत्ररिया शामिल हैं।
इन चारों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि सभी का सामाजिक और संस्थागत प्रभाव मजबूत है। ऐसे में मतदाताओं का रुझान किस ओर जाता है, यह देखना अहम होगा।
न्यू डोनर श्रेणी में 7 उम्मीदवारों की दावेदारी
वहीं न्यू डोनर श्रेणी में एक पद के लिए सात उम्मीदवारों ने नामांकन भरा है। इनमें राजेश अग्रवाल, संदीप पारिख, जयेश पटेल, नीरज देसाई, हरपालसिंह भाटिया, गुरमीतसिंह भाटिया और मानवीरसिंह बायस शामिल हैं।
एक ही पद के लिए सात दावेदार होने के कारण इस श्रेणी में मुकाबला और भी ज्यादा रोचक और प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है।
21 मई को मतदान और परिणाम
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 4 मई से डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मुख्य मतदान 21 मई को कराया जाएगा। खास बात यह है कि मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना भी की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी दोनों सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल और विवाद
हालांकि, इस चुनाव प्रक्रिया के साथ विवाद भी जुड़े हुए हैं। कॉलेज के संविधान में हाल ही में किए गए संशोधनों और चुनाव में हुई देरी को लेकर कुछ सदस्यों में असंतोष देखा जा रहा है।
सबसे बड़ा विवाद ‘ओल्ड डेलियन्स’ श्रेणी को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू करने को लेकर है। कई पूर्व छात्र और सदस्य इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं और इसे परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं।
नाराज सदस्यों ने इस मुद्दे को प्रशासन तक पहुंचाया है। कुछ लोगों ने कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है, वहीं मामला न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी इस संबंध में याचिका दायर की गई है।
संस्थान की साख और चुनाव की अहमियत
डेली कॉलेज न केवल इंदौर बल्कि देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे में इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही बोर्ड संस्थान की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और विकास योजनाओं को दिशा देता है।
इस बार के चुनाव में जहां एक ओर अनुभवी और प्रभावशाली उम्मीदवार मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर नए चेहरों की भी मजबूत दावेदारी है। इससे चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर 3 मई को जारी होने वाली अंतिम उम्मीदवार सूची और 21 मई को होने वाले मतदान पर टिकी है। विवादों और कानूनी चुनौतियों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न होता है या इसमें कोई बदलाव होता है।
फिलहाल, डेली कॉलेज का यह चुनाव न सिर्फ संस्थान के लिए बल्कि शहर के शैक्षणिक और सामाजिक परिदृश्य के लिए भी अहम माना जा रहा है।