दतिया के भांडेर सब स्टेशन में लाइन सुधार कार्य के दौरान अचानक चालू हुई सप्लाई, झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर !

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दतिया जिले की भांडेर तहसील स्थित 33 केवी टीवी टावर सब स्टेशन पर शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। लाइन सुधार कार्य के दौरान अचानक बिजली सप्लाई शुरू हो जाने से एक आउटसोर्स कर्मचारी तेज करंट की चपेट में आ गया। हादसे में कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गया। उसे प्राथमिक उपचार के बाद झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

घटना के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।


लाइन सुधार के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार घायल कर्मचारी की पहचान धर्मेंद्र जाटव (35) निवासी दबोह, जिला भिंड के रूप में हुई है। वह पिछले करीब दो वर्षों से आउटसोर्स कर्मचारी के तौर पर 33 केवी सब स्टेशन में कार्यरत था।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे धर्मेंद्र 33 केवी लाइन पर सुधार कार्य कर रहा था। इसी दौरान अचानक लाइन में बिजली सप्लाई शुरू हो गई। हाई वोल्टेज करंट लगते ही धर्मेंद्र गंभीर रूप से झुलस गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक करंट इतना तेज था कि कुछ देर तक कोई कर्मचारी उसके पास जाने की हिम्मत नहीं कर सका। हादसे के बाद सब स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई।


कर्मचारियों ने बंद कराई सप्लाई

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बिजली सप्लाई बंद कराई और घायल धर्मेंद्र को बाहर निकाला। गंभीर हालत में उसे तत्काल भांडेर अस्पताल पहुंचाया गया।

डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत नाजुक देखते हुए झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जानकारी के मुताबिक धर्मेंद्र करीब 60 प्रतिशत तक झुलस गया है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।


सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

हादसे के बाद बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लाइन पर काम शुरू करने से पहले पूरी तरह बिजली सप्लाई बंद करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।

लोगों का आरोप है कि यदि विभागीय कर्मचारी सही समन्वय रखते और लाइन को सुरक्षित तरीके से बंद किया जाता, तो यह हादसा नहीं होता।

कई लोगों ने यह भी सवाल उठाए कि जब कर्मचारी लाइन पर काम कर रहा था, तब सप्लाई दोबारा कैसे चालू हो गई? क्या संबंधित अधिकारियों ने अनुमति दिए बिना लाइन चालू कर दी थी या तकनीकी लापरवाही हुई?


आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा पर बहस

इस घटना ने बिजली विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी बहस छेड़ दी है। अक्सर ऐसे कर्मचारी सीमित संसाधनों और कम सुरक्षा उपकरणों के साथ जोखिम भरे काम करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों जैसी सुरक्षा सुविधाएं और प्रशिक्षण नहीं मिल पाता, जिसके कारण इस तरह के हादसे बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाई वोल्टेज लाइनों पर काम करने वाले कर्मचारियों को विशेष सुरक्षा किट, इंसुलेटेड उपकरण और स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।


विभाग की चुप्पी से बढ़े सवाल

घटना के कई घंटे बाद तक बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही घायल कर्मचारी के उपचार का पूरा खर्च विभाग उठाए और उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।


पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

बिजली विभाग में लाइन सुधार कार्य के दौरान करंट लगने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और समन्वय की कमी हादसों की बड़ी वजह बनती है।

विशेषज्ञों के अनुसार 33 केवी जैसी हाई वोल्टेज लाइन पर काम करते समय “लाइन क्लियर परमिट” और “लॉकआउट सिस्टम” का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। यदि इन प्रक्रियाओं का सही पालन न हो तो जानलेवा हादसे हो सकते हैं।


परिवार में मचा कोहराम

घटना की सूचना मिलते ही धर्मेंद्र जाटव के परिवार में कोहराम मच गया। परिजन तुरंत अस्पताल पहुंचे। परिवार का कहना है कि धर्मेंद्र घर का मुख्य कमाने वाला सदस्य है और उसकी हालत को लेकर सभी चिंतित हैं।

परिजनों ने विभाग से न्याय और आर्थिक मदद की मांग की है।


जांच की मांग तेज

घटना के बाद स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं।

फिलहाल घायल कर्मचारी का झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

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