मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में लंबे समय से रुकी कार्यवाहक पदोन्नति प्रक्रिया अब दोबारा शुरू होने जा रही है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की प्रशासन शाखा ने 6 मई को राज्य की सभी पुलिस इकाइयों को पत्र जारी कर उच्च पदों पर कार्यवाहक प्रभार यानी अस्थायी पदोन्नति देने की प्रक्रिया फिर से प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक प्रमोशन का इंतजार कर रहे हजारों पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया फैसला
कार्यवाहक पदोन्नति प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का निर्णय जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है। अदालत ने 23 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में पुलिस विभाग को उच्च पदों पर कार्यवाहक प्रभार देने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने विभागीय स्तर पर प्रक्रिया फिर से शुरू करने का फैसला लिया। प्रशासन शाखा द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि विभाग में रिक्त पदों को देखते हुए अब कार्यवाहक प्रभार दिए जा सकेंगे।

डेढ़ साल से बंद थी प्रक्रिया
दरअसल, जून 2025 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नियमित पदोन्नति संबंधी नई अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने 20 जून 2025 को कार्यवाहक पदोन्नति की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित कर दी थी।
उस समय तर्क दिया गया था कि वर्ष 2005 से 2025 तक के पदोन्नति नियमों को लेकर हाईकोर्ट में कानूनी विवाद लंबित है। ऐसे में विभाग किसी प्रकार की अस्थायी पदोन्नति देने की स्थिति में नहीं था।
इस निर्णय के कारण जिला पुलिस बल में निरीक्षक, रक्षित निरीक्षक और अन्य वरिष्ठ पद लंबे समय तक खाली पड़े रहे। इसका असर पुलिस प्रशासन और कार्यप्रणाली पर भी देखने को मिला।
खाली पदों के कारण बढ़ा दबाव
कार्यवाहक पदोन्नति प्रक्रिया बंद होने से कई जिलों में अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही थी। कई पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही थीं, जिससे कार्य का दबाव लगातार बढ़ रहा था।
विशेष रूप से निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर पर बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के कारण पुलिस व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। कई अधिकारी वर्षों से प्रमोशन की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन प्रक्रिया रुकी होने के कारण उन्हें राहत नहीं मिल पा रही थी।
2015 बैच के अधिकारी भी कर रहे थे इंतजार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2015 बैच के सूबेदार और उप निरीक्षक संवर्ग के अधिकारी करीब 11 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे।
इन अधिकारियों का कहना था कि समय पर प्रमोशन नहीं मिलने से न केवल करियर प्रभावित हो रहा है, बल्कि मनोबल भी गिर रहा है। अब कार्यवाहक पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से इन अधिकारियों को राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
क्या होती है कार्यवाहक पदोन्नति
कार्यवाहक पदोन्नति यानी किसी अधिकारी या कर्मचारी को नियमित प्रमोशन से पहले अस्थायी रूप से उच्च पद का प्रभार देना। इससे विभाग में रिक्त पदों पर कामकाज प्रभावित नहीं होता और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू बनी रहती है।
हालांकि यह नियमित पदोन्नति नहीं होती, लेकिन अधिकारी को उच्च पद की जिम्मेदारी और कई मामलों में उससे जुड़े अधिकार मिल जाते हैं।
विभागीय कामकाज में आएगी तेजी
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कार्यवाहक पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से विभागीय कामकाज में तेजी आएगी। खाली पदों पर जिम्मेदार अधिकारी मिलने से प्रशासनिक निर्णय लेने में सुविधा होगी और कानून व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
इसके अलावा लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा, जिसका सकारात्मक असर विभागीय कार्यशैली पर पड़ेगा।
नियमित पदोन्नति पर अब भी बनी स्थिति स्पष्ट नहीं
हालांकि कार्यवाहक पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन नियमित पदोन्नति को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है। पदोन्नति नियमों से जुड़ा मामला अब भी न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस विभाग ने अस्थायी व्यवस्था के रूप में कार्यवाहक प्रभार देने का निर्णय लिया है, ताकि विभागीय कार्य प्रभावित न हों।
पुलिसकर्मियों में खुशी का माहौल
पीएचक्यू के इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में खुशी का माहौल है। लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारी और अधिकारी अब उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही उन्हें नई जिम्मेदारियां मिल सकेंगी।
पुलिस विभाग के जानकारों का कहना है कि यह फैसला न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पुलिस बल के भीतर सकारात्मक माहौल भी बनेगा।