मध्य प्रदेश की बहुचर्चित और संवेदनशील भोजशाला विवाद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद में पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन आवेदन पर सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है।
फैसले के बाद धार और इंदौर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार होने के कारण संवेदनशीलता और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करता है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
वर्षों पुराना है भोजशाला विवाद
धार स्थित भोजशाला लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है।

यह मामला फिर से उस समय चर्चा में आया जब साल 2022 में रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप स्पष्ट करने और हिंदू समाज को पूजा-अर्चना के पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई थी।
एएसआई ने किया था 98 दिन का सर्वे
मामले की सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने का निर्देश दिया गया था।
साल 2024 में एएसआई ने लगभग 98 दिनों तक परिसर का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। इस दौरान संरचनात्मक अवशेष, शिलालेख, स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक प्रमाणों की जांच की गई।
इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूरे दिन निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति भी दी थी। उसी के बाद इस मामले की सुनवाई और तेज हुई।
अप्रैल से मई तक चली लगातार सुनवाई
6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई थी, जो 12 मई तक चली। करीब एक महीने से अधिक समय तक चली सुनवाई में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे।
हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने भोजशाला को प्राचीन वाग्देवी मंदिर बताते हुए कई ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य प्रस्तुत किए।
मंदिर होने के पक्ष में दिए गए ये तर्क
हिंदू पक्ष ने अदालत में दावा किया कि भोजशाला प्राचीन काल में मां सरस्वती यानी वाग्देवी का प्रसिद्ध मंदिर और विद्या केंद्र था।
याचिकाकर्ताओं ने एएसआई रिपोर्ट, ब्रिटिशकालीन गजेटियर, ऐतिहासिक दस्तावेज और पुराने अभिलेख अदालत में प्रस्तुत किए। इनमें परिसर में मिले मंदिर स्थापत्य के अवशेष, नक्काशीदार स्तंभ, संस्कृत और नागरी लिपि के शिलालेख और देवी सरस्वती से जुड़े प्रतीकों का उल्लेख किया गया।
याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि परिसर के कई संरचनात्मक तत्व इस्लामी स्थापत्य से पहले के हैं, जो मंदिर स्वरूप की पुष्टि करते हैं।
साथ ही लंबे समय से वसंत पंचमी और अन्य धार्मिक अवसरों पर पूजा-अर्चना की परंपरा का हवाला भी अदालत में दिया गया।
प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा
फैसले के बाद धार और इंदौर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। संवेदनशीलता को देखते हुए भोजशाला परिसर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। अधिकारियों ने दोनों समुदायों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा न करें।
जुमे की नमाज को लेकर विशेष सतर्कता
शुक्रवार होने के कारण प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है। परंपरागत रूप से शुक्रवार को मुस्लिम समाज भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
देशभर में चर्चा का विषय बना मामला
भोजशाला विवाद लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। यह मामला धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और पुरातात्विक दावों से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस विवाद के अगले कानूनी और प्रशासनिक चरण पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।