सागर संभाग में लंबित पेंशन और वेतन निर्धारण के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संभागायुक्त अनिल सुचारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सेवा निवृत्त शासकीय कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों का निराकरण सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पेंशन और परिवार पेंशन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि यह सीधे तौर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका से जुड़ा विषय है।
सागर में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कमिश्नर ने संयुक्त संचालक पेंशन को निर्देशित किया कि वे संभाग के सभी जिलों में लंबित पेंशन और परिवार पेंशन के मामलों की सूची तैयार करें और उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि जिन कार्यालयों में लंबे समय से प्रकरण लंबित हैं, वहां के आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में एक गंभीर लापरवाही का मामला भी सामने आया, जिसमें पन्ना जिले के सहायक संचालक मत्स्य उद्योग द्वारा एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन प्रकरण में गलत जन्मतिथि दर्ज कर दी गई थी। इस त्रुटि के कारण पेंशन प्रकरण का समय पर निराकरण नहीं हो सका। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कमिश्नर ने संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही से न केवल प्रक्रिया में विलंब होता है, बल्कि हितग्राही को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इसके साथ ही कमिश्नर ने वेतन निर्धारण के लंबित प्रकरणों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा को निर्देशित किया कि सागर संभाग में लंबित लगभग 713 वेतन निर्धारण के मामलों का निराकरण सात दिनों के भीतर किया जाए और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि वेतन निर्धारण में देरी से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होता है, जिसे हर हाल में टालना चाहिए।

समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों के कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। उद्योग विभाग को निर्देश दिए गए कि वे सागर संभाग की औद्योगिक इकाइयों में जल संवर्धन अभियान के अंतर्गत पौधरोपण के लिए कार्ययोजना तैयार करें। वर्षा ऋतु में बड़े स्तर पर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। कमिश्नर ने कहा कि सभी औद्योगिक प्रशिक्षण इकाइयों में शत-प्रतिशत सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित किया जाए, ताकि युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें।
सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की भी समीक्षा बैठक में चर्चा हुई। इनमें मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक योजना, कल्याणी पेंशन योजना, मुख्यमंत्री अविवाहित पेंशन योजना और मुख्यमंत्री दिव्यांग पेंशन योजना शामिल हैं। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि इन योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचे और किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

कुल मिलाकर, यह समीक्षा बैठक प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। पेंशन और वेतन निर्धारण जैसे संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्यवाही के निर्देश यह दर्शाते हैं कि प्रशासन आम कर्मचारियों और नागरिकों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। यदि इन निर्देशों का सही ढंग से पालन किया जाता है, तो निश्चित ही लंबित प्रकरणों में तेजी आएगी और प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी।