बकस्वाहा जैन मंदिर में प्राकृत शिक्षण शिविर का शुभारंभ: धर्म, ज्ञान और संस्कृति का अनूठा संगम !

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छतरपुर,
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बकस्वाहा नगर स्थित श्री 1008 श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रविवार को प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन धार्मिक आस्था, ज्ञान और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विद्यार्थी और विद्वान शामिल हुए।

शिविर का शुभारंभ सुबह 8 बजे विधि-विधान और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण से हुई, जिसके बाद शिविर कलश स्थापना और दीप प्रज्वलन जैसे पावन अनुष्ठान संपन्न हुए। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का माहौल बना रहा, जिसने उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।

विद्वानों का सम्मान, ज्ञान पर विशेष जोर

शुभारंभ अवसर पर प्राकृत भाषा और जैन दर्शन के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले विद्वानों का सम्मान किया गया। उनके कार्यों की सराहना करते हुए आयोजकों ने कहा कि ऐसे विद्वानों के प्रयासों से ही प्राचीन भाषाओं और परंपराओं का संरक्षण संभव हो पा रहा है। इस सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

व्यवस्थित शैक्षणिक कार्यक्रम

शिविर में प्रतिभागियों के लिए एक विस्तृत और सुनियोजित शैक्षणिक कार्यक्रम तैयार किया गया है। सुबह 8 से 9 बजे तक द्रव्य संग्रह, प्राकृत व्याकरण और संभाषण की कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे प्रतिभागियों को भाषा की मूलभूत समझ विकसित करने का अवसर मिल रहा है।

दोपहर 3 से 4 बजे तक जैन धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘समयसार’ का अध्ययन कराया जाएगा, जिसमें जीवन, आत्मा और मोक्ष के गूढ़ सिद्धांतों पर चर्चा होगी। वहीं, शाम 7:30 से 8:15 बजे तक गुणस्थान विषय पर विद्वानों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे, जो आध्यात्मिक उन्नति के विभिन्न चरणों को समझाने में सहायक होंगे।

इसके अलावा, प्रतिदिन रात 8:15 से 9:30 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें भक्ति गीत, नाट्य प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। ये कार्यक्रम शिविर के वातावरण को जीवंत और प्रेरणादायक बना रहे हैं।

युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

इस शिविर में संत गणेश वर्णी सम्यक संस्कार केंद्र पाठशाला के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों का मानना है कि ऐसे शिविर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं।

आज के आधुनिक दौर में जब युवा वर्ग पारंपरिक ज्ञान से दूर होता जा रहा है, ऐसे आयोजन उन्हें अपनी विरासत को समझने और आत्मसात करने का अवसर प्रदान करते हैं।

समाज की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष, मंत्री रोहित शाह, अनेकांत जैन, कोषाध्यक्ष अनिल जैन, शैलेश जैन, डॉ. मुकेश जैन, पंडित अभिषेक जैन, सुमत जैन, महेश जैन, चंद्रकुमार जैन, नरेश जैन और सौरभ जैन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इसके अलावा जैन युवा मंच, मधुवन यात्रा संघ, महिला मंडल और बालिका मंडल के सदस्यों की भी बड़ी संख्या में सहभागिता रही, जिससे आयोजन की भव्यता और उत्साह में वृद्धि हुई।

धर्म और ज्ञान का संगम

यह प्राकृत शिक्षण शिविर न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिकता का एक ऐसा मंच है, जहां विभिन्न आयु वर्ग के लोग एकत्र होकर सीखने और समझने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, बकस्वाहा का यह शिविर समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा है और आने वाले दिनों में भी यह प्रतिभागियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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