कहते हैं अगर मेहनत, लगन और नई सोच के साथ खेती की जाए तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है। सागर जिले के बड़कुआं गांव के किसान गोविंद पटेल ने यह साबित कर दिखाया है।
गोविंद ने पारंपरिक खेती को छोड़कर शिमला मिर्च की आधुनिक पद्धति से खेती शुरू की और सिर्फ एक एकड़ ज़मीन से 5 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। अब गोविंद की यह सफलता जिलेभर के किसानों के लिए प्रेरणा की कहानी बन चुकी है।

ड्रिप मल्चिंग और नेट हाउस से की आधुनिक खेती
गोविंद पटेल ने शिमला मिर्च की खेती के लिए ड्रिप मल्चिंग तकनीक और नेट हाउस का उपयोग किया। इससे न केवल फसल को मौसम के प्रभाव से बचाया जा सका बल्कि पानी और उर्वरक की बचत भी हुई।
उन्होंने बताया कि इस खेती के लिए जून में नर्सरी पौधे ट्रांसप्लांट किए गए और जुलाई के अंत से तुड़ाई शुरू हो गई थी।
“पहले गेहूं और चना की बुवाई करता था, लेकिन अब नेट हाउस में मिर्च उगाकर देखा तो नतीजे हैरान करने वाले हैं।” — गोविंद पटेल, किसान बड़कुआं
6 लाख खर्च में 12 लाख की मिर्च बेची
गोविंद पटेल ने बताया कि खेती की शुरुआत में करीब एक लाख रुपये की लागत आई थी। इसके बाद दवाओं, स्प्रे और देखरेख में कुल 6 लाख रुपये का खर्च हुआ। वहीं अब तक करीब 12 लाख रुपये की मिर्च बेच चुके हैं, यानी उन्हें 5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
उन्होंने बताया कि हर तुड़ाई में 15 से 30 क्विंटल मिर्च निकलती है, और अब तक करीब 250 क्विंटल शिमला मिर्च खेत से निकल चुकी है।
मिर्च का भाव 20 से 55 रुपये प्रति किलो तक मिला है, जिससे अच्छी आमदनी हुई।
फरवरी–मार्च तक चलेगी फसल
गोविंद का कहना है कि यदि फसल की देखरेख नियमित रूप से होती रही तो फरवरी-मार्च तक मिर्च की तुड़ाई जारी रहेगी।
उनका मानना है कि नेट हाउस खेती से न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। इससे किसान बाजार में अच्छे दाम पा सकते हैं।
प्रेरणा बने गोविंद — नई पीढ़ी के लिए उदाहरण
गोविंद पटेल ने बताया कि उन्होंने खेती परिवार की परंपरा के रूप में सीखी है, लेकिन समय के साथ नई तकनीकें अपनाकर उन्होंने खेती को लाभ का व्यवसाय बना दिया है।
अब उनके गांव और आसपास के किसान भी नेट हाउस और ड्रिप सिंचाई पद्धति से खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।