बांदरी गौरव दिवस से जागी सांस्कृतिक चेतना !

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बांदरी। नगर की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित ‘बांदरी गौरव दिवस’ इस वर्ष भी उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रतिभा सम्मान और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर युवा भाजपा नेता अविराज सिंह ने कहा कि उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का सशक्त जरिया हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में हुआ, जिनकी पहल पर ‘बांदरी गौरव दिवस’ की परंपरा शुरू की गई। इस आयोजन ने न केवल नगर की सांस्कृतिक आत्मा को जागृत किया है, बल्कि इसे एक नई पहचान भी दी है। अविराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मेले और महोत्सव समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं। ये हमें हमारी परंपराओं, लोक-कलाओं और क्षेत्रीय संस्कृति से जोड़ते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को हमारी विरासत से परिचित कराते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में समाज के हर वर्ग की सहभागिता होती है, जहां अमीर-गरीब, छोटे-बड़े सभी एक साथ खड़े होकर आनंद लेते हैं। यह दृश्य समाज में समानता, भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि महोत्सव एक जीवंत पाठशाला की तरह होते हैं, जहां बिना किसी पुस्तक के लोग अपने पूर्वजों के संघर्ष, त्याग और जीवन मूल्यों को सहज ही सीख लेते हैं।

कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रही ‘सारेगामा पा’ फेम गायिका प्रियांशी श्रीवास्तव की प्रस्तुति, जिन्होंने अपने मधुर गीतों से पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। उन्होंने “हौले-हौले हो जाएगा प्यार…”, “मेरे नाम तू…” और “झुमका गिरा रे…” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनके गायन ने युवा और परिवार सहित उपस्थित सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा और लोगों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।

‘बांदरी गौरव दिवस’ के दौरान शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को भी सम्मानित किया गया। कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 5100 रुपए की नगद राशि और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इन प्रतिभाशाली छात्रों में पूनम अहिरवार, जूली सौंर, निशा सूर्यांश तिवारी, राधिका विश्वकर्मा, नैंसी लोधी, साक्षी लोधी, रोशनी रैंकवार, चिराग विश्वकर्मा, कशिश राजा परमार, निशा साहू, सावित्री पटेल और मोहनी राय शामिल रहे।

इसके अलावा नगर परिषद बांदरी के समर्पित कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने नगर की सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फायर विभाग के वाहन चालक भगत सिंह लोधी, लखन आदिवासी, भगवान सिंह लोधी, हेल्पर शैलेंद्र लोधी तथा सफाई कर्मी कमला वाल्मीकि और देवकी वाल्मीकि को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस पहल ने समाज के उन कर्मयोगियों को सम्मान देने का कार्य किया, जो अक्सर पर्दे के पीछे रहकर सेवा करते हैं।

अविराज सिंह ने कहा कि ‘बांदरी गौरव दिवस’ अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नगर की पहचान बन चुका है। यह उत्सव भूपेंद्र सिंह की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिन्होंने केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन राजनीति और जात-पात से ऊपर उठकर पूरे नगर को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं में राष्ट्र के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। जब युवा अपनी संस्कृति, परंपराओं और इतिहास को समझते हैं, तो वे समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार बनते हैं। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी समाज की प्रगति उसके सामाजिक आयोजनों की समावेशिता और समानता से मापी जा सकती है।

कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष सुधा लोधी, पूर्व मंडल अध्यक्ष शारदा लोधी सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में अनुशासन, प्रबंधन और सामूहिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला।

समापन के साथ यह कहा जा सकता है कि ‘बांदरी गौरव दिवस’ केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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