मंगलम चाय के नाम पर धोखाधड़ी: भारी मात्रा में नकली माल जब्त !

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सागर। देश की प्रसिद्ध चाय कंपनी Sagar Tea Company के लोकप्रिय ब्रांड मंगलम चाय की नकल कर बाजार में नकली चाय पत्ती बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में रॉयल मंगलम चाय और रॉयल प्रीमीयम मंगलम चाय नाम से उत्पाद तैयार कर बेचने वालों पर अब कानून का शिकंजा कस गया है।

सागर के वर्णी कॉलोनी स्थित वैभव मोदी स्टोर्स और विशाल ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कंपनी को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि VISHAL & ANR. द्वारा ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जिनकी पैकेजिंग, नाम, डिजाइन और ब्रांडिंग पूरी तरह से मंगलम चाय से मिलती-जुलती है। बताया जा रहा है कि पैकेजिंग का स्वरूप इतना समान था कि आम उपभोक्ता आसानी से भ्रमित हो सकता था और नकली उत्पाद को असली समझकर खरीद सकता था।

प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि यह पूरा मामला केवल ब्रांड की नकल तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को गुमराह कर अवैध मुनाफा कमाने का प्रयास भी है। यह गतिविधि Trade Marks Act 1999 और Copyright Act 1957 का सीधा उल्लंघन मानी गई है।

इस मामले में कंपनी की ओर से नवकार एसोसिएट्स के अधिवक्ता नम्रता जैन और विजय सोनी ने Delhi District Court के वाणिज्यिक न्यायालय में याचिका दायर की। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर और मजबूत मानते हुए लोकल कमिश्नर नियुक्त किया और पुलिस की सहायता से सर्च और सीज़र (जब्ती) की अनुमति प्रदान की।

कोर्ट के आदेश पर 4 मई को सागर के वर्णी कॉलोनी स्थित परिसर में लोकल कमिश्नर और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। इस दौरान बड़ी मात्रा में रॉयल मंगलम चाय और रॉयल प्रीमीयम मंगलम चाय नाम से तैयार की गई नकली चाय पत्ती की पैकेजिंग बरामद की गई, जो मूल ब्रांड की हूबहू नकल थी।

बरामद सभी नकली माल को मौके पर ही जब्त कर सील कर दिया गया है और अब इसे कोर्ट की कस्टडी में रखा गया है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अब से रॉयल मंगलम चाय और रॉयल प्रीमीयम मंगलम चाय नाम से किसी भी प्रकार का निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण, प्रचार या विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और संबंधित पक्ष के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह कार्रवाई न केवल ब्रांड की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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