छतरपुर ।
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां मंदिर के लिए चंदा मांगने को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसा में बदल गया। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के महाराजगंज गांव में दबंगों ने दो क्विंटल गेहूं न देने पर एक ही परिवार के पांच सदस्यों पर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस घटना में महिलाएं और किशोर सहित सभी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 55 वर्षीय कुरा अहिरवार अपने परिवार के साथ घर पर मौजूद थे। इसी दौरान गांव के कुछ लोग—श्याम पटेल, हरदयाल पटेल, कृपाल पटेल, राजा भैया पटेल और श्रीपत पटेल—उनके घर पहुंचे और मंदिर निर्माण/कार्य के लिए दो क्विंटल गेहूं देने की मांग करने लगे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कुरा अहिरवार ने एक क्विंटल गेहूं देने की बात कही, लेकिन यह बात आरोपियों को नागवार गुजरी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने पहले गाली-गलौज शुरू की, फिर अचानक आक्रामक होकर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। हमले में कुरा अहिरवार (55), उनकी पत्नी गिरजा अहिरवार (53), पुत्र वीरेंद्र अहिरवार (26), अमर अहिरवार (15) और रिश्तेदार छिद्दी अहिरवार (45) गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घायल अवस्था में परिजन किसी तरह सभी को लेकर सीधे थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और घायलों को जिला अस्पताल भेजा। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हमले की झलक दिखाई दे रही है। वीडियो के वायरल होने के बाद मामला और ज्यादा गंभीर हो गया और प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।
पुलिस ने फरियादी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी श्याम लाल पटेल, हरदयाल पटेल, कृपाल पटेल और राजा भैया पटेल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की अतिरिक्त तैनाती भी की गई है, ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने।

यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता और दबंगई की प्रवृत्ति को भी उजागर करती है। मंदिर जैसे धार्मिक कार्य के नाम पर जबरन चंदा मांगना और न देने पर हिंसा करना सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक संकेत है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रशासन से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
कुल मिलाकर, महाराजगंज गांव की यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और किसी भी प्रकार की दबंगई या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।