सागर। जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां बाघिन N6 ने चार शावकों को जन्म दिया है। सोमवार को गश्ती दल ने एक गुफा के पास बाघिन को अपने शावकों के साथ देखा, जिसकी तस्वीरें कैमरे में कैद की गईं। बाघिन और उसके सभी शावक पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह वही बाघिन N6 है जिसे लगभग एक वर्ष पहले पेंच टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर यहां लाया गया था। खास बात यह है कि इस बाघिन ने पहली बार शावकों को जन्म दिया है, जो रिजर्व के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रजनीश सिंह ने बताया कि बाघिन और उसके शावकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। शुरुआती दो वर्ष शावकों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए उनके आसपास ट्रैकर कैमरे लगाए गए हैं और गश्ती दल को भी सतर्क किया गया है। उन्होंने कहा कि रिजर्व में अनुकूल वातावरण, पर्याप्त शिकार और सुरक्षित आवास के कारण बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

चार नए शावकों के जन्म के साथ ही टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा अब 30 के पार पहुंच गया है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। वन विभाग का मानना है कि यहां का प्राकृतिक परिवेश और बेहतर प्रबंधन बाघों की वंशवृद्धि के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।
अगर पिछले वर्षों की बात करें तो इस क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ने की कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। वर्ष 2018 में पहली बार एक बाघिन को नौरादेही अभयारण्य (अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) में लाया गया था। इससे पहले यहां पन्ना क्षेत्र के बाघों का ही आना-जाना होता था। इसके बाद वंशवृद्धि के उद्देश्य से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक नर बाघ को भी लाया गया।
इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2019 में पहली बार बाघिन राधा (N1) ने तीन शावकों को जन्म दिया, जिससे यहां बाघों की स्थायी आबादी बनने की शुरुआत हुई। समय के साथ बाघिनों की संख्या बढ़ती गई और उन्होंने लगातार शावकों को जन्म देकर इस कुनबे को मजबूत किया। हाल ही में एक वर्ष पहले भी बाघिन N-112 अपने चार शावकों के साथ कैमरे में कैद हुई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में टाइगर रिजर्व में करीब 65 प्रतिशत बाघिनें हैं, जो वंशवृद्धि के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। यही कारण है कि यहां हर वर्ष बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
कुल मिलाकर, बाघिन N6 द्वारा चार शावकों को जन्म देना न केवल वन विभाग के संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि सही प्रबंधन और प्राकृतिक संतुलन के साथ वन्यजीवों का संरक्षण संभव है। आने वाले समय में यह टाइगर रिजर्व प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।