सागर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय, शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में भारतीय ज्ञानपरंपरा के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली और सामाजिक चेतना पर गहन विचार विमर्श हुआ।

मुख्य वक्ता डॉ. रेखा वख्शी ने कहा कि हम सामाजिक, शारीरिक और मानसिक रूप से कितनी परिपक्वता के साथ सोच पाते हैं, यह हमारा मानसिक स्वास्थ्य तय करता है। उन्होंने बताया कि युवा वर्ग सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग और लाइक-फॉलोवर्स के दबाव में मानसिक तनाव का शिकार हो रहा है। धैर्य और सहनशीलता को अपनाकर यह तनाव कम किया जा सकता है।

प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि भारतीय विद्वानों ने विज्ञान, दर्शन और अध्यात्म को एक इकाई के रूप में देखा। मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति को सामाजिक प्राणी बनकर प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना होगा। नितिन शर्मा, जनभागीदारी अध्यक्ष ने बताया कि भारतीय ज्ञानपरंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक, दार्शनिक और मानवकेंद्रित है।
विशिष्ट वक्ता डॉ. संतोष गुप्ता ने कहा कि विश्व हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत का स्थान 147 देशों में 118वां है, जिससे स्पष्ट होता है कि देश में खुशी और मानसिक स्वास्थ्य का स्तर अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों को काउंसिलिंग की आवश्यकता होती है जो मानसिक भ्रम या आवाजें सुनते हैं।

शोधार्थी मयुरेश नामदेव ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित ध्यान, प्राणायाम और सकारात्मक सोच अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मोबाइल और टीवी से समय पर दूरी बनाकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहिए और सत्संग एवं दूसरों की सहायता करना मानसिक स्थिरता के लिए लाभकारी है।
कार्यक्रम में डॉ. जयकुमार सोनी, डॉ. सुनील साहू, डॉ. देवेन्द्र ठाकुर, डॉ. शालिनी परिहार, डॉ. अनिल महरोलिया, डॉ. मनीष चौधरी, डॉ. रश्मि दुबे, डॉ. शिखा चौबे सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन डॉ. अमरकुमार जैन, भारतीय ज्ञानपरंपरा नोडल अधिकारी ने किया।
व्याख्यानमाला ने विद्यार्थियों और उपस्थित जनों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, सकारात्मक जीवनशैली और भारतीय ज्ञानपरंपरा के आधुनिक दृष्टिकोण से जागरूक किया।