कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट प्रतिभा पाल के निर्देशानुसार जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट भवन के सभा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डिप्टी कलेक्टर रजत सोनी ने की। इस बैठक में उच्च शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक न्याय, आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, उनके व्यवहार में हो रहे बदलावों तथा शैक्षणिक वातावरण को सुरक्षित, सकारात्मक और तनावमुक्त बनाए रखने के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना बेहद आवश्यक है, ताकि बढ़ते तनाव और नकारात्मक प्रवृत्तियों को समय रहते रोका जा सके।
समिति द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि निजी शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों के प्रतिनिधियों को भी इस निगरानी समिति से जोड़ा जाएगा, जिससे सभी स्तरों पर समन्वय स्थापित किया जा सके। साथ ही प्रत्येक संस्थान में काउंसलर की नियुक्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं बिना झिझक साझा कर सकें।
विशेष रूप से कन्या महाविद्यालयों के लिए यह निर्णय लिया गया कि वहां प्रत्येक माह गायनाकोलॉजिस्ट के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इससे छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और जागरूकता प्राप्त होगी, जो उनके समग्र विकास में सहायक साबित होगी।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों की सतत निगरानी की जाए। यदि किसी छात्र में तनाव, अवसाद या अन्य मानसिक समस्याओं के संकेत मिलते हैं, तो उसकी तुरंत पहचान कर काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए और अभिभावकों को समय पर इसकी जानकारी दी जाए।
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके दुष्प्रभावों को देखते हुए समिति ने जागरूकता अभियान चलाने पर भी सहमति जताई। विद्यार्थियों को डिजिटल संतुलन बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल और कॉलेजों में नियमित रूप से योग और मेडिटेशन सत्र आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया, ताकि छात्रों को तनाव से राहत मिल सके और उनमें सकारात्मक सोच विकसित हो।
समिति ने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए मासिक बैठकों के आयोजन पर भी जोर दिया। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा हो सकेगी और आवश्यक सुधार समय-समय पर किए जा सकेंगे।
इसके अलावा, शहर के सभी शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों की एक विस्तृत सूची तैयार करने का निर्णय लिया गया, जिसे आगामी बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। इससे जिले में संचालित सभी संस्थानों की समुचित निगरानी और समन्वय संभव हो सकेगा।
कुल मिलाकर, यह बैठक विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और उन्हें सुरक्षित, सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। प्रशासन की इस पहल से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे मानसिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेंगे।