कर्रापुर स्थित श्री सिद्ध क्षेत्र पेलेपार देवीघाट मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पावन अवसर पर भाजपा युवा नेता श्री अविराज सिंह ने युवाओं को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उपदेशों के माध्यम से राष्ट्र और धर्म की रक्षा का प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के प्रत्येक कार्य से हमें यह सिखाया है कि जीवन में किसी भी परिस्थिति में मुस्कराते रहना और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना ही सच्चा धर्म है।

भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का सार
श्रीमद् भागवत कथा के मंच पर व्यासपीठ पर विराजमान संत श्री विपिन बिहारी जी को प्रणाम करते हुए श्री अविराज सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण, सुदामा, अर्जुन, कर्ण और पूतना के प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कालिया नाग के साथ युद्ध के प्रसंग को साझा करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के दौरान भी कालिया नाग के सिर पर चढ़कर नृत्य किया, जो यह दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमें धैर्य और प्रसन्नता बनाए रखनी चाहिए।

श्री सिंह ने कहा, “भगवान श्रीकृष्ण ने हमें सिखाया है कि जीवन में कोई भी परिस्थिति हो, हमें हमेशा मुस्कराते रहना चाहिए। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि हर स्थिति में सकारात्मकता और साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए।”
श्रीकृष्ण: आदर्श गुरु और अहंकार का नाश
श्री अविराज सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण को एक आदर्श गुरु के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि वेद-पुराणों में वर्णित है कि एक सच्चा गुरु वही होता है जो अपने शिष्य की अच्छाइयों के साथ-साथ उनकी कमियों को भी उजागर करता है और उनके अहंकार को दूर करता है। उन्होंने महाभारत के एक प्रसंग का उल्लेख किया, जिसमें अर्जुन और कर्ण के बीच युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उनके अहंकार से अवगत कराया।
उन्होंने बताया, “जब अर्जुन और कर्ण के बीच युद्ध चल रहा था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा, ‘हे कौंतेय! जिस रथ पर तुम सवार हो, उसकी रक्षा पवनसुत हनुमान कर रहे हैं और मैं स्वयं तुम्हारा सारथी हूँ। फिर भी कर्ण के तीर ने हमारे रथ को दो कदम पीछे धकेल दिया। अब तुम्हें समझना चाहिए कि प्रशंसा किसकी होनी चाहिए।’ इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का अहंकार तोड़ा और उन्हें विनम्रता का पाठ पढ़ाया।”
अहंकार से विनाश, विनम्रता से उत्थान
श्री अविराज सिंह ने अहंकार के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “अहंकार से कुल, गौरव और वंश का नाश हो जाता है। रावण, कौरव और कंस जैसे महानायकों का अंत उनके अहंकार के कारण ही हुआ। इसलिए हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए।” उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमें सिखाया है कि विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा ही जीवन का आधार है।
युवाओं का कर्तव्य: राष्ट्र और धर्म की रक्षा
श्री सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि एक युवा के रूप में श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। उन्होंने अधर्म का अंत करने के लिए कंस जैसे दुराचारी का वध किया। इस प्रसंग से प्रेरणा लेते हुए श्री सिंह ने युवाओं को संदेश दिया कि उनका प्रथम कर्तव्य है अपने राष्ट्र, अपनी जन्मभूमि और अपने धर्म की रक्षा करना।
उन्होंने कहा, “हम सभी युवाओं का धर्म है कि हम सबकी रक्षा करें, सभी का सम्मान करें। भगवान श्रीकृष्ण ने हमें यह सिखाया है कि हमें अपनी संस्कृति, अपने राष्ट्र और अपने धर्म के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।”
कथा में उपस्थिति और प्रभाव
श्रीमद् भागवत कथा के इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, जो श्री अविराज सिंह के विचारों और भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों से गहरे प्रभावित हुए। संत श्री विपिन बिहारी जी ने भी श्री सिंह के विचारों की सराहना की और युवाओं से इस संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।