सागर में सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना की समीक्षा, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
सागर, 29 सितंबर 2025: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सोयाबीन उत्पादक किसानों के हित में लागू की जा रही भावांतर योजना की जिला स्तर पर समीक्षा बैठक कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री संदीप जी.आर. की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में कलेक्टर ने योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक अमले को स्पष्ट दायित्व सौंपे और योजना की विशेषताओं को व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाना शासन की प्राथमिकता है, और इसके लिए किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित यह योजना सोयाबीन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का पूर्ण लाभ सुनिश्चित करेगी, जिससे अन्नदाताओं की आय संरक्षण होगा।

कलेक्टर का उद्बोधन: किसानों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने कहा कि भावांतर योजना सोयाबीन उत्पादकों के लिए एक वरदान साबित होगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा सोयाबीन के लिए निर्धारित एमएसपी 5328 रुपये प्रति क्विंटल है, और यदि मंडी में मॉडल भाव या विक्रय मूल्य इससे कम होता है, तो अंतर की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। “जिस प्रकार धान और गेहूं पर किसानों को उनके परिश्रम की उचित कीमत दिलवाई गई है, उसी प्रकार सोयाबीन किसानों को भी पूर्ण लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। योजना की जानकारी सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग से गांव-गांव तक पहुंचाई जाए,” कलेक्टर ने जोर देकर कहा।
श्री संदीप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल पूरी की जाएं। पंजीयन प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो, ताकि कोई पात्र किसान लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि हितग्राही को सीधा लाभ मिलना चाहिए, और किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। “सभी अधिकारी किसानों के हित को प्राथमिकता दें। भावांतर योजना के प्रचार-प्रसार में कोई कसर न छोड़ें, ताकि अधिक से अधिक अन्नदाता इसका लाभ उठा सकें,” उन्होंने कहा।
पंजीयन और क्रियान्वयन की प्रक्रिया
भावांतर योजना के तहत पंजीयन का कार्य 10 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य होगा, जिसमें किसान अपने रकबे का विवरण दर्ज करेंगे। पंजीकृत किसानों और उनके रकबे के सत्यापन की प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से पूरी की जाएगी। भावांतर की अवधि 1 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी। योजना के अंतर्गत किसान अपनी उपज मंडियों में ही बेचेंगे, और एमएसपी तथा मंडी के मॉडल भाव/विक्रय मूल्य के बीच का अंतर डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किसान के पंजीकृत बैंक खाते में जमा किया जाएगा।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ तीन स्थितियों में मिलेगा। पहली स्थिति में, यदि उत्पादन मॉडल भाव पर बिकता है (उदाहरणस्वरूप 4600 रुपये प्रति क्विंटल), तो एमएसपी (5328 रुपये) और मॉडल भाव के अंतर (628 रुपये) की राशि प्रदान की जाएगी। दूसरी स्थिति में, यदि विक्रय मूल्य एमएसपी से कम लेकिन राज्य के औसत मॉडल प्राइस के समतुल्य है, तो भी अंतर की राशि मिलेगी। तीसरी स्थिति में, यदि विक्रय मूल्य राज्य के औसत मॉडल प्राइस से कम है, तो एमएसपी और घोषित औसत मॉडल प्राइस के भावांतर की राशि दी जाएगी। “प्रत्येक स्थिति में किसान भाई को लाभ सुनिश्चित होगा, और योजना पूर्णतः पारदर्शी होगी,” श्री संदीप ने कहा।
भावांतर योजना: एक नजर में
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आइएसए) के अंतर्गत अधिसूचित तिलहनी फसल सोयाबीन के लिए भावांतर योजना वर्ष 2018-19 से मध्य प्रदेश में लागू है। यह योजना किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए डिजाइन की गई है, जहां किसान मंडी में अपनी फसल बेचते हैं, लेकिन सरकार मूल्य अंतर की भरपाई करती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 सितंबर 2025 को जैसीनगर में सभा को संबोधित करते हुए इसकी घोषणा की, जो किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए की गई। यदि मंडी भाव एमएसपी से कम रहता है, तो सरकार घाटे की भरपाई करेगी, जिससे किसानों को न्यूनतम 5328 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिलेगा।
सागर जिले में सोयाबीन की खेती प्रमुख फसल है, और इस योजना से हजारों किसानों को लाभ होगा। जिला कृषि विभाग ने प्रचार के लिए ग्राम पंचायतों, सहकारी समितियों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। पोर्टल पर पंजीयन के लिए किसानों को आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और भूमि रिकॉर्ड तैयार रखने की सलाह दी गई है।
बैठक में उपस्थित अधिकारी और भविष्य की योजना
बैठक में जिला पंचायत सीईओ, कृषि उप संचालक, राजस्व अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं, और पंजीयन प्रक्रिया की प्रगति की रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जाए, और किसानों को सही दाम मिलने की मॉनिटरिंग सख्ती से की जाए। “भावांतर योजना किसानों के हित में है, इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें। पात्र किसान समय पर पंजीयन करवा लें, ताकि कोई लाभ से वंचित न रहे,” श्री संदीप ने अंत में कहा।
किसानों में उत्साह, उम्मीदें बढ़ीं
सागर जिले के सोयाबीन उत्पादक किसानों में इस योजना को लेकर उत्साह है। एक किसान ने कहा, “पिछले वर्षों में बाजार भाव के कारण नुकसान हुआ था, लेकिन अब सरकार की यह योजना हमें राहत देगी।” जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्प डेस्क स्थापित करने की योजना बनाई है, ताकि पंजीयन में किसी को असुविधा न हो।
यह योजना न केवल सोयाबीन किसानों की आय स्थिर करेगी, बल्कि मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी। कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के नेतृत्व में सागर जिला इस योजना को सफल बनाने के लिए कटिबद्ध है, जो अंततः अन्नदाताओं के कल्याण का प्रतीक बनेगी।