सीएम मोहन यादव ने दिए सीजीएम एके जैन को हटाने के निर्देश !

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मध्य प्रदेश की राजनीति बुधवार को अचानक बिजली से गुलज़ार हो उठी। किसानों को बिजली सप्लाई पर जारी कठोर आदेश ने ऐसा तूफान खड़ा किया कि प्रदेश के ऊर्जा गलियारों से लेकर विधानसभा के सेंट्रल हॉल तक इसकी चर्चा गूंजती रही। अंत में, मामला सीधा मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुंचा और परिणामस्वरूप मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के चीफ जनरल मैनेजर एके जैन को हटाने के निर्देश जारी हुए।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की जयंती कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम मोहन यादव ने साफ कहा कि सरकार किसानों को 10 घंटे बिजली देने के लिए प्रतिबद्ध है। किसान सुख और खेतों की हरियाली सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे में उल्टे आदेश निकालने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

पृष्ठभूमि यह थी कि तीन नवंबर को CGM एके जैन ने आदेश जारी कर कहा था कि यदि किसी कृषि फीडर पर 10 घंटे से अधिक बिजली दी गई, तो ऑपरेटर की सैलरी काटी जाएगी। लगातार कुछ दिनों तक ऐसा होने पर जेई से लेकर जीएम तक की सैलरी कटने का प्रावधान दर्शाया गया था। कंपनी ने यहां तक कहा कि तकनीकी कारण या मौसम में बदलाव के बाद भी अतिरिक्त बिजली देना नियम उल्लंघन माना जाएगा।

दैनिक भास्कर ने इस विवादित आदेश को उजागर किया और किसानों में नाराजगी की लहर दौड़ पड़ी। विपक्ष ने भी मोर्चा खोलते हुए सरकार पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रवक्ता राहुल शर्मा ने कहा कि भाजपा एक तरफ पर्याप्त बिजली देने का दावा करती है और दूसरी तरफ सैलरी कटौती के आदेश जारी करती है।

सीएम के हस्तक्षेप के बाद अब पूरे मामले की समीक्षा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। फिलहाल किसानों को यह राहत जरूर मिली है कि उनकी फसलें नियमों के चक्रव्यूह में नहीं फंसेंगी और बिजली मिलने का आश्वासन पुख्ता है।

बिजली और किसानों के बीच पैदा हुए इस तुफानी विवाद ने यह साबित किया है कि खेत की मेड़ पर चलने वाली राजनीति कभी मौन नहीं रहती। जहां किसान, वहां सत्ता का नब्ज़। सरकार फिलहाल किसानों के साथ खड़ी दिख रही है, लेकिन निगाहें अब आने वाले फैसलों पर टिकी रहेंगी कि यह राहत स्थायी है या सिर्फ सियासी फुहार।

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