नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया ने केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर छावनी परिषद् सागर (मध्यप्रदेश) को नगरीय निकाय में समाहित करने की सशक्त एवं तात्कालिक मांग रखी है। विधायक ने अपने पत्र में विलय प्रक्रिया के वर्तमान खंडित स्वरूप और उससे उत्पन्न होने वाली व्यवहारिक समस्याओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला है तथा रक्षा मंत्रालय से मांग की है कि प्रस्तावित विलय राज्य सरकार के स्वामित्व अधिकार के साथ ही पूर्ण रूप से लागू किया जाए।

क्या है समस्या — अतिरिक्त शर्त से विलय का अर्थ व्यर्थ होगा
विधायक लारिया ने पत्र में उल्लेख किया है कि जिला प्रशासन द्वारा रक्षा मंत्रालय के दिशानिर्देशानुसार संशोधित विलय प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, परंतु रक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विलय समिति ने इस पर आपत्ति जताते हुए एक अतिरिक्त शर्त जोड़ दी है। समिति की उक्त शर्त के अनुसार प्रस्तावित क्षेत्र का प्रशासनिक व नगरिकरण संबंधी विलय नगरीय निकाय में ही किया जाएगा, किन्तु भूमि का स्वामित्व रक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) के पास रहता रहेगा।
विधायक ने स्पष्ट किया कि इस शर्त से राज्य सरकार को केवल सफाई, पेयजल और कर संग्रह जैसे सीमित अधिकार ही प्राप्त होंगे; पर भूमि पर राज्य का अधिकार न होने के कारण—
- नगरीय विकास कार्य (रोड, सीवर, सार्वजनिक पार्क, बुनियादी ढांचा इत्यादि) का समुचित क्रियान्वयन संभव नहीं रहेगा,
- केन्द्र/राज्य योजनाओं और जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लाभ क्षेत्र के नागरिकों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँच पाएगा,
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नगर निकाय द्वारा दीर्घकालिक निवेश व योजनाओं का क्रियान्वयन बाधित होगा।
लारिया ने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में समग्र विलय का कोई अर्थ नहीं निकलेगा और नागरिकों की अपेक्षाएँ अधूरी रह जाएँगी।
सुरक्षा कारण और भूमि के वास्तविक उपयोग पर सवाल
विधायक ने पत्र में यह भी कहा है कि सेना के उच्च अधिकारियों द्वारा बार-बार सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कृषि भूमि और बंगला क्षेत्रों के विलय पर आपत्ति जताई जा रही है। हालाँकि, सांसद के अनुसार, जब-जब सेना को विस्तार या अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ी है, राज्य सरकार ने वांछित भूमि उपलब्ध कराई है — कुल मिलाकर सागर जिले में लगभग दो हजार एकड़ से अधिक भूमि पहले भी सेना को दी जा चुकी है। परन्तु विधायक ने यह भी इंगित किया है कि उपलब्ध कराई गई भूमि का लगभग 60 प्रतिशत वर्तमान में सेना द्वारा उपयोग में नहीं है। ऐसे तथ्य को उद्धृत करते हुए उन्होंने पूछा है कि क्या सुरक्षा कारणों के नाम पर बार-बार विलय प्रक्रिया में अड़चनें उत्पन्न करना तार्किक व न्यायसंगत है।
विधायक की मांगें — समुचित स्वामित्व और नागरिकहित पर बल
विधायक लारिया ने रक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि:
- जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तावित छावनी परिषद के क्षेत्र का विलय नगरीय निकाय में ऐसे नियमों व शर्तों के साथ हो जो राज्य सरकार को स्वामित्व अधिकार प्रदान करें।
- विलय के बाद नगर निकाय को पूर्ण रूप से योजनात्मक, वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए जाएँ ताकि नागरिकों को मूलभूत सुविधाएँ और शासन-लाभ सहजता से मिलें।
- विलय समिति द्वारा लगाए गए अतिरिक्त शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए और यदि सुरक्षा-संबंधी वास्तविक चिंताएँ हैं तो उनका वैकल्पिक विवेकपूर्ण समाधान निकाला जाए ताकि विलय का उद्देश्य सार्थक बन सके।
विधायक ने पत्र में यह भी कहा कि विलय के पक्ष में नगर व केन्द्र की और से उठ रही जनभावनाएँ और स्थानीय जनहित को ध्यान में रखा जाए, क्योंकि यह कदम केवल प्रशासनिक पुनर्रचना नहीं बल्कि नागरिकों के विकास, सांस्कृतिक व आर्थिक उत्थान से जुड़ा हुआ है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम — नागरिक, विकास और योजनात्मक लाभ
विधायक ने अपने पत्र में यह बताए जाने पर जोर दिया कि छावनी परिषद को नगरीय निकाय में शामिल करने से—
- शहरी सुविधाओं का समुचित विस्तार होगा (नालों/नालियों की मरम्मत, पेयजल आपूर्ति, सड़क व स्वच्छता),
- कर-आधारित राजस्व का विवेकपूर्ण उपयोग स्थानीय विकास कार्यों में हो सकेगा,
- केन्द्र व राज्य की योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक प्रभावी रूप से पहुँच सकेगा, तथा
- स्थानीय प्रशासनिक जवाबदेही व पारदर्शिता बढ़ेगी।
लारिया ने यह भी सुझाव दिया कि यदि सुरक्षा कारणों का समाधान चाहिए तो रक्षा मंत्रालय व राज्य प्रशासन मिलकर एक such mechanism (जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का सीमांकन या सुरक्षा-सम्बंधी प्रावधान) तैयार करें, परंतु भूमि के पूर्ण स्वामित्व से ही नगरीय विकास के अर्थपूर्ण कदम उठाए जा सकेंगे।
आगे की संभावित प्रक्रिया
विधायक प्रदीप लारिया ने पत्र के अंत में विनम्र आग्रह किया है कि रक्षा मंत्री महोदय इस आग्रह को गंभीरता से लेकर विलय समिति एवं संबंधित केंद्रीय व राज्य विभागों के साथ शीघ्र विचार-विमर्श कराते हुए सकारात्मक निर्णय प्रदान करें। इसके बाद जिला प्रशासन को दिशा-निर्देश जारी कर आगे के कानूनी-प्रशासनिक प्रक्रियाएँ त्वरित की जा सकती हैं।
छावनी परिषद् का नगरीय निकाय में विलय न सिर्फ स्थानीय प्रशासनिक ढांचे में बदलाव होगा, बल्कि सागर के निवासियों के जीवन स्तर, बुनियादी सुविधाओं और विकास योजनाओं पर भी दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव डालने की संभावना है। इसलिये विधायक ने अनुरोध किया है कि केन्द्र व राज्य दोनों स्तरों पर जनहित व सुरक्षा के समुचित संतुलन के साथ तात्कालिक एवं निर्णायक रुख अपनाया जाए।