चांदामऊ अग्निकांड की जांच के लिए NHRC की टीम गांव पहुंची !

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सागर जिले के जरुआखेड़ा पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चांदामऊ में करीब 45 दिन पहले हुए दर्दनाक अग्निकांड की जांच के लिए मंगलवार को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) की टीम गांव पहुंची। दिल्ली से आई इस जांच टीम में ईसन सिंह और निरीक्षक रामनाथ शामिल थे। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, आग से जले मकान को देखा और सरपंच सहित कई ग्रामीणों के बयान दर्ज किए।

जले मकान का किया निरीक्षण, पीड़ित परिवार मौके पर नहीं मिला

एनएचआरसी की टीम ने उस मकान का निरीक्षण किया, जहां भीषण आग लगने से एक ही परिवार के तीन सदस्य झुलस गए थे। टीम ने मकान की स्थिति, आग से हुए नुकसान और आसपास के हालात का जायजा लिया। हालांकि जांच के दौरान पीड़ित परिवार का कोई भी सदस्य गांव में मौजूद नहीं मिला। इसके बाद टीम ने पीड़ित परिवार से फोन पर संपर्क किया, जिस पर परिजनों ने बताया कि वे फिलहाल सागर में हैं।

टीम ने स्पष्ट किया कि अगली कड़ी में आगजनी में झुलसी परिवार की बेटी समेत अन्य सदस्यों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

4 दिसंबर की रात हुआ था भीषण अग्निकांड

यह दर्दनाक घटना 4 दिसंबर की रात की है, जब ग्राम चांदामऊ के एक मकान में अचानक भीषण आग लग गई थी। उस समय घर में सो रहे दो भाई और उनकी बहन आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए थे। ग्रामीणों की मदद से तीनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

इलाज के दौरान 7 दिसंबर को छोटे बेटे और 13 दिसंबर को बड़े बेटे की मौत हो गई थी। जबकि झुलसी बहन का इलाज अभी भी जारी है। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया था।

10 दिन बाद लगाया गया आगजनी का आरोप

घटना के करीब 10 दिन बाद पीड़ित परिवार ने गांव के ही एक व्यक्ति फईम खान पर जानबूझकर आग लगाने का आरोप लगाया था। इसके बाद गांव में इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए थे और निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी थी।

ग्रामीणों के बयान दर्ज, जांच आगे जारी

एनएचआरसी की टीम ने गांव में रह रहे पड़ोसियों और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष गवाहों से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए हैं। टीम का कहना है कि सभी पहलुओं—दुर्घटना, लापरवाही या साजिश—को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।

जांच टीम के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि पीड़ित परिवार और घायल बेटी के बयान दर्ज होने के बाद ही इस मामले में आगे की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। एनएचआरसी की इस जांच से ग्रामीणों को निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय की उम्मीद जगी है।

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