मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रयास नहीं बल्कि प्रदेश के समग्र विकास का आधार है। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक जनभागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में वर्ष 2025 के जल गंगा संवर्धन अभियान की उपलब्धियों की समीक्षा की गई और वर्ष 2026 के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, दीपाली रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
भू-जल संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भू-जल स्रोतों के अत्यधिक दोहन के कारण भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। इसके साथ ही प्राचीन जल संरचनाओं का क्षरण और नदियों के प्रवाह में कमी भी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण को हटाने और ऐसी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा और उनके आसपास बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा, जिससे जल स्रोतों का संरक्षण हो सके।
समाज की भागीदारी से जल संरक्षण

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सामुदायिक पहल से प्याऊ लगाने की परंपरा को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को हतोत्साहित करने तथा सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने को सामाजिक दायित्व के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि जिन जिलों में जल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर नवाचार हुए हैं, वे अपने अनुभव अन्य जिलों के साथ साझा करें, ताकि पूरे प्रदेश में इन प्रयासों का लाभ मिल सके।
जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री इस अभियान का नेतृत्व करेंगे। इसके साथ ही सांसद, विधायक, पंचायत और नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर संगठनों को भी अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए।
जिला कलेक्टरों को नोडल अधिकारी बनाकर कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
19 मार्च से शुरू होगा राज्य स्तरीय अभियान
बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान वर्ष प्रतिपदा 19 मार्च से पूरे प्रदेश में एक साथ शुरू होगा। अभियान के तहत जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जल संरचनाओं के संवर्धन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
अभियान के दौरान 23 और 24 मई को भोपाल में अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन आयोजित होगा। इसके बाद 25 से 26 मई तक शिप्रा परिक्रमा यात्रा निकाली जाएगी। 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर उज्जैन के शिप्रा तट पर महादेव नदी कथा का आयोजन किया जाएगा। वहीं 30 मई से 7 जून तक भारत भवन भोपाल में सदानीरा समागम आयोजित होगा, जिसमें प्रदेश की कृषि भूमि की सैटेलाइट मैपिंग का लोकार्पण किया जाएगा।
जल संरक्षण के हजारों कार्य होंगे
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और वाटरशेड विकास 2.0 के तहत 170 करोड़ रुपये की लागत से 2200 जल संरक्षण कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा वर्ष 2025 में शुरू किए गए 86 हजार 360 खेत-तालाब और 553 अमृत सरोवरों के कार्यों को भी पूरा किया जाएगा।
नगरीय विकास विभाग नगरीय निकायों में 120 जल संग्रहण संरचनाओं का संवर्धन और 50 हरित क्षेत्रों का विकास करेगा। साथ ही 4 हजार 130 रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने और नदियों में मिलने वाले 20 नालों के शोधन का लक्ष्य रखा गया है।
वन विभाग और अन्य विभागों की भी भागीदारी
वन विभाग द्वारा अविरल निर्मल नर्मदा अभियान के अंतर्गत भू-जल संवर्धन के कार्यों के साथ वर्षा ऋतु में 28 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा वन्य जीवों के लिए 25 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से 400 से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और 189 तालाबों का गहरीकरण किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे और पोषण वाटिकाएं विकसित की जाएंगी, ताकि समुदाय को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान को जनआंदोलन बनाकर ही जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है, इसलिए सभी विभागों और समाज के हर वर्ग को इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।