शादी की खुशियां मातम में बदलीं: डबरी में डूबा मासूम, तलाश जारी !

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बीना के खिमलासा थाना क्षेत्र के बसाहरी गांव में एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों के माहौल को गहरे शोक में बदल दिया। गांव में एक शादी समारोह चल रहा था, जहां हंसी-खुशी का माहौल था, लेकिन अचानक हुई इस घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। एक पानी से भरी डबरी (छोटा तालाब) में नहाने गए दो मासूम भाई-बहन डूबने लगे, जिसमें पिता ने साहस दिखाते हुए बेटी की जान बचा ली, लेकिन 8 वर्षीय बेटा गहरे पानी में समा गया और उसका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

घटना मंगलवार की बताई जा रही है। बसाहरी गांव स्थित गोड बब्बा मंदिर के पास एक शादी समारोह आयोजित था, जिसमें दूर-दराज से रिश्तेदार और मेहमान शामिल होने आए थे। इसी दौरान राजाराम कुशवाहा के बच्चे—11 वर्षीय चाहत और 8 वर्षीय राज—खेलते-खेलते पास ही बनी पानी से भरी डबरी तक पहुंच गए। गर्मी के मौसम में बच्चों ने नहाने का विचार किया और बिना किसी को बताए पानी में उतर गए।

कुछ ही देर में दोनों बच्चे गहरे पानी में फंस गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे। बच्चों की आवाज सुनकर उनके पिता राजाराम, जो उस समय लगभग 50 मीटर की दूरी पर थे, तुरंत दौड़कर डबरी तक पहुंचे। उन्होंने बिना देर किए पानी में कूदकर अपनी बेटी चाहत को बाहर खींच लिया। हालांकि, तब तक उनका छोटा बेटा राज गहराई में जा चुका था और नजरों से ओझल हो गया।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। शादी का माहौल अचानक मातम में बदल गया और परिजन व ग्रामीण बच्चे की तलाश में जुट गए। गांव के लोगों ने अपने स्तर पर काफी प्रयास किए, लेकिन डबरी में पानी अधिक गहरा होने के कारण कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। बच्चे की तलाश के लिए तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। सागर से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीम को बुलाया गया, जिसने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

एनडीआरएफ की टीम ने मंगलवार देर शाम तक डबरी में सघन खोज अभियान चलाया, लेकिन अंधेरा होने के कारण ऑपरेशन को रोकना पड़ा। टीम ने बताया कि बुधवार सुबह से एक बार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाएगा, ताकि लापता बच्चे का पता लगाया जा सके।

इस दर्दनाक घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। जिस घर में शादी की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहीं अब मातम का माहौल है। परिजन बेटे के मिलने की उम्मीद में लगातार प्रार्थना कर रहे हैं।

यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। विशेष रूप से जलाशयों, तालाबों या डबरियों के पास बच्चों को अकेले जाने से रोकना बेहद जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की खुली और गहरी पानी की जगहें अक्सर खतरा बन जाती हैं, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते।

प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे बच्चों को अकेले जल स्रोतों के पास न जाने दें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। फिलहाल सभी की निगाहें बुधवार सुबह शुरू होने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं, और परिवार को उम्मीद है कि उनका बेटा जल्द मिल जाएगा।

यह घटना एक गहरा सबक है कि खुशियों के बीच भी सतर्कता बनाए रखना कितना जरूरी है, ताकि इस तरह के हादसों से बचा जा सके।

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