कृषि व्यवस्थाओं पर कलेक्टर सख्त !

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सागर जिले में किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और रबी उपार्जन कार्य को सुचारू बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में कृषि एवं संबंधित विभागों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में कृषि, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य, नागरिक आपूर्ति तथा मार्कफेड विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान रबी उपार्जन 2026, उर्वरक वितरण व्यवस्था और ई-टोकन सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के किसानों को खाद, बीज और उपार्जन से संबंधित किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर सभी मूलभूत व्यवस्थाएं जैसे तौल कांटे, बारदाना, पेयजल और छाया आदि पूर्ण रूप से उपलब्ध रहें, ताकि किसानों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि उपार्जन कार्य पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाए।

समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से चना और मसूर की खरीदी व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडियों से उपार्जन केंद्रों तक परिवहन की गति तेज की जाए, जिससे खरीदी गई फसल का समय पर उठाव हो सके। इसके साथ ही उन्होंने उपार्जन केंद्रों की मैपिंग का कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि पूरे जिले में खरीदी प्रक्रिया सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो सके।

कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि उपार्जन के बाद अनाज को खुले में रखने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीदे गए अनाज को तत्काल सुरक्षित गोदामों में पहुंचाया जाए। इसके लिए जिले में उपलब्ध साइलो और वेयरहाउस की क्षमता का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि अनाज को खुले में रखा गया तो इससे नुकसान की संभावना बढ़ जाती है, जिसे हर हाल में टालना जरूरी है।

बैठक में बारदाना (बोरी) की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों की मांग के अनुसार समय पर बारदाना उपलब्ध कराया जाए, ताकि तुलाई प्रक्रिया बाधित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को उनके अनाज का भुगतान समय पर किया जाना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

उर्वरक वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में खाद का वितरण केवल ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से ही किया जाए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पारदर्शिता बनाए रखने और कालाबाजारी रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है। कलेक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी दुकानें ई-टोकन प्रणाली का पालन नहीं करेंगी, उन्हें तत्काल प्रभाव से सील कर दिया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-टोकन प्रणाली का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि किसान इस व्यवस्था के प्रति जागरूक हो सकें और बिना किसी परेशानी के खाद प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध रहे और किसी भी स्थिति में कृत्रिम कमी न उत्पन्न होने दी जाए।

कलेक्टर ने बैठक के दौरान सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा, तभी किसानों को वास्तविक लाभ मिल सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे समय-समय पर उपार्जन केंद्रों और उर्वरक वितरण केंद्रों का निरीक्षण करें और भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करें।

बैठक में उपसंचालक कृषि राजेश त्रिपाठी, डीएमओ मार्कफेड रोहित बघेल सहित कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

कुल मिलाकर, इस समीक्षा बैठक के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि किसानों के हितों से जुड़ी किसी भी योजना में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। रबी उपार्जन, उर्वरक वितरण और भुगतान व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि जिले के किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से सभी सुविधाएं उपलब्ध हों।

इस पहल से न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी, जो जिले के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

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