फोन कॉल बना मौत का जाल, सागर में युवक की हत्या !

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मध्यप्रदेश के सागर जिले से एक दिल दहला देने वाला हत्याकांड सामने आया, जहां एक साधारण सा फोन कॉल किसी व्यक्ति की जिंदगी का आखिरी बुलावा बन गया। 10 अप्रैल 2026 को भेड़ा गांव के रहने वाले महेंद्र अहिरवार की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड ने न सिर्फ पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया, बल्कि रिश्तों में पनपते शक और सामाजिक दबाव की भयावह तस्वीर भी सामने रख दी।

फोन कॉल से शुरू हुई साजिश

घटना की शुरुआत एक साधारण फोन कॉल से हुई। “हैलो, मैं शारदा बोल रही हूं… शाम को खाने पर घर आ जाओ, दीदी भी यहीं है।” यह कॉल महेंद्र के लिए किसी आम निमंत्रण जैसा था, लेकिन इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश छिपी थी। शारदा, जो कि लीला की मुंहबोली बहन थी, ने महेंद्र को सागर के राजीव नगर स्थित घर बुलाया।

महेंद्र को यह अंदाजा नहीं था कि यह बुलावा उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। वह घर से यह कहकर निकला कि थोड़ी देर में वापस लौट आएगा, लेकिन वह फिर कभी नहीं लौटा। उसकी पत्नी और 12 साल की बेटी रातभर उसका इंतजार करती रहीं।

सड़क किनारे बोरे में मिली लाश

अगले दिन 11 अप्रैल की सुबह सागर-बंडा मार्ग पर कर्रापुर के पास सड़क किनारे एक संदिग्ध बोरा मिला। बोरे के बाहर खून लगा हुआ था, जिससे लोगों में डर फैल गया। पुलिस मौके पर पहुंची और जब बोरा खोला गया, तो उसमें एक व्यक्ति की लाश मिली।

लाश की हालत बेहद खराब थी। गर्दन कटी हुई थी और शरीर पर धारदार हथियार के कई घाव थे। आसपास खून न मिलने से यह साफ हो गया कि हत्या कहीं और की गई थी और शव को यहां लाकर फेंका गया था।

पहचान के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। आखिरकार मृतक की पहचान महेंद्र अहिरवार के रूप में हुई। यह खबर उसके परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी।

अफेयर के शक में रची गई साजिश

जांच में सामने आया कि महेंद्र की गांव की एक महिला लीला से नजदीकियां थीं। इस बात की जानकारी लीला के पति हरिशंकर अहिरवार को हो गई थी। गांव में यह चर्चा फैलने लगी, जिससे परिवार की बदनामी हो रही थी।

हरिशंकर ने कई बार महेंद्र को चेतावनी दी, लेकिन जब उसे लगा कि बात नहीं बन रही, तो उसने खौफनाक साजिश रच डाली। इस साजिश में उसकी पत्नी लीला, मुंहबोली साली शारदा, साला किस्सू, भाई गणेश और बेटा सत्यम भी शामिल हो गए।

खाना बना मौत का कारण

10 अप्रैल की शाम महेंद्र जब राजीव नगर पहुंचा, तो वहां शारदा और लीला मौजूद थीं। कुछ देर बाद बाकी आरोपी भी वहां आ गए। सभी ने मिलकर खाना खाने का नाटक किया।

खाने के दौरान किसी बात पर बहस शुरू हो गई। अचानक गुस्से में आकर लीला के भाई गणेश ने कुल्हाड़ी उठाई और महेंद्र की गर्दन पर जोरदार वार कर दिया। हमला इतना घातक था कि महेंद्र को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उस समय महेंद्र के हाथ में रोटी और ककड़ी थी, और एक निवाला उसके गले में फंसा रह गया था। यह दृश्य इस घटना की भयावहता को और भी बढ़ा देता है।

शव ठिकाने लगाने की साजिश

हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की। शव को एक बोरे में भरा गया, जिसका मुंह साड़ी फाड़कर बांधा गया था। इसके बाद गणेश अपने भाई भूपेंद्र का इलेक्ट्रिक ऑटो लेकर आया।

रात के अंधेरे में आरोपी शव को ऑटो में रखकर बंडा रोड की ओर ले गए और कर्रापुर के पास सड़क किनारे फेंक दिया। इसके बाद सभी आरोपी वापस घर लौट आए और सामान्य दिनचर्या का दिखावा करने लगे।

पुलिस जांच और खुलासा

इस मामले को सुलझाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन तीन प्रमुख तरीकों से पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही—

  • सीसीटीवी फुटेज: पुलिस ने सागर-बंडा मार्ग के कैमरों की जांच की, जिसमें एक संदिग्ध नीले रंग का इलेक्ट्रिक ऑटो दिखाई दिया।
  • मोबाइल कॉल डिटेल्स: महेंद्र के फोन की जांच में शारदा का नंबर सामने आया, जिससे शक गहराया।
  • संदिग्धों की निगरानी: पुलिस ने गांव में निगरानी बढ़ाई, जिसमें कुछ आरोपी फरार मिले, जबकि कुछ को हिरासत में लिया गया।

पूछताछ के दौरान पहले आरोपी पुलिस को गुमराह करते रहे, लेकिन सख्ती के बाद उन्होंने पूरी साजिश कबूल कर ली।

गिरफ्तारी और फरार आरोपी

पुलिस ने इस मामले में शारदा और भूपेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मुख्य आरोपी हरिशंकर, लीला, गणेश, किस्सू और सत्यम की तलाश जारी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश सिंहा के अनुसार, हत्या अवैध संबंधों के शक के चलते की गई।

समाज के लिए एक चेतावनी

यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि यह समाज में बढ़ते अविश्वास, गुस्से और संवादहीनता की गंभीर समस्या को उजागर करती है। रिश्तों में शक और बदनामी के डर ने एक परिवार को अपराध की राह पर धकेल दिया, जिसकी कीमत एक निर्दोष व्यक्ति को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

महेंद्र की 12 साल की बेटी आज भी उस दिन का इंतजार कर रही है, जब उसके पिता घर लौटते—लेकिन अब वह इंतजार हमेशा अधूरा ही रहेगा।

यह हत्याकांड हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत शक इतनी बड़ी हिंसा को सही ठहरा सकते हैं? जवाब स्पष्ट है—नहीं। ऐसे मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करता है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि समाज में जागरूकता और संवाद को बढ़ाया जाए, ताकि ऐसे दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

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