सागर जिले में गेहूं उपार्जन व्यवस्था सुदृढ़: किसानों की सुविधा और पारदर्शिता पर विशेष जोर !

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सागर जिले में रबी उपार्जन सत्र 2026 के दौरान राज्य सरकार द्वारा किसानों की सुविधा, पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से आयोजित वर्चुअल समीक्षा बैठक में गेहूं, चना और मसूर उपार्जन की स्थिति का आकलन करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और सभी उपार्जन केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले के कलेक्टर प्रतिदिन उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि वहां पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि किसानों का भुगतान समय पर किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित उपार्जन केंद्रों की भी नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया गया।

इस वर्ष सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। मध्यम और बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा को विस्तार दिया गया है। पहले जहां स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 थी, उसे बढ़ाकर 9 मई 2026 कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस सुविधा का लाभ उठा सकें। विभिन्न संभागों में स्लॉट बुकिंग की शुरुआत अलग-अलग तिथियों से की गई है, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।

राज्य सरकार ने उपार्जन केंद्रों की क्षमता भी बढ़ाई है। पहले प्रति केंद्र प्रतिदिन 1000 क्विंटल गेहूं की तौल की सीमा थी, जिसे बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। इससे अधिक किसानों को कम समय में अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, प्रत्येक केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है, जिससे तौल प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सके।

किसानों की सुविधा के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर जाकर अपनी उपज बेच सकते हैं। इससे उन्हें लंबी दूरी तय करने या विशेष केंद्र पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा, हर शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग और उपार्जन का कार्य जारी रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे प्रक्रिया में निरंतरता बनी रहे।

उपार्जन केंद्रों पर आवश्यक संसाधनों की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल, तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण शामिल हैं। साथ ही, उपज की सफाई के लिए पंखे और छलनी जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इन सभी सुविधाओं के फोटो भारत सरकार के पीसी सेप पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

वित्तीय दृष्टि से भी किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने समर्थन मूल्य के साथ बोनस देने का निर्णय लिया है। किसानों से गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित होगा।

भंडारण और परिवहन की व्यवस्था भी मजबूत की गई है। जूट बारदाने के साथ-साथ पीपी/एचडीपी बैग का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उपज का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जा सके। राज्य में पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध कराई गई है, ताकि खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित रखा जा सके।

आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश में लाखों किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं और बड़ी मात्रा में गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। करोड़ों रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है, जो इस पूरी प्रक्रिया की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत 25 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर पूरे प्रदेश में जल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस दिन जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में दोपहर 3 से 5 बजे के बीच कार्यक्रम आयोजित किए जाएं और इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हों।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम किसानों के हितों की रक्षा करने, उपार्जन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

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