नवजात शिशु की मृत्यु पर सख्ती: सागर में तीन सदस्यीय जांच दल गठित, लापरवाही के आरोपों की होगी निष्पक्ष जांच !

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जिले में नवजात शिशु की मृत्यु का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। इस संवेदनशील घटना को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रतिभा पाल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

प्रसव के दौरान लापरवाही के आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम जौरा नरयावली निवासी श्रीमती रीना राजपूत को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. प्रतिभा द्वारा समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया। इससे प्रसव के दौरान जटिलताएं बढ़ गईं और अंततः नवजात शिशु की मृत्यु हो गई।

परिजनों का कहना है कि यदि समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने परिवार को गहरा दुख पहुंचाया है और क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बना दिया है।

जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत जांच समिति का गठन किया। इस समिति में स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक क्षेत्र के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो।

समिति में डॉ. सचिन मलैया (क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं), डॉ. ब्रजेश यादव (जिला चिकित्सालय) और प्रवीण दुबे (नायब तहसीलदार, सागर ग्रामीण) को सदस्य बनाया गया है।

मौके पर जांच और रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश

गठित जांच दल को निर्देशित किया गया है कि वह घटनास्थल पर जाकर पूरे मामले की विस्तृत जांच करे। समिति को शिकायत के सभी बिंदुओं का गहन परीक्षण करने के साथ-साथ मेडिकल रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।

जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।यह घटना सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेष रूप से प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में समय पर उपचार का अभाव गंभीर परिणाम दे सकता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, संसाधनों की पर्याप्तता और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।परिजनों और आमजन को उम्मीद है कि जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की कमी को गंभीरता से लिया जाएगा।नवजात शिशु की मृत्यु का यह मामला बेहद दुखद और संवेदनशील है। जांच समिति की रिपोर्ट इस मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी उजागर करती है।ऐसी घटनाएं न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी हैं, बल्कि यह भी संकेत देती हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े।

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