नरवाई प्रबंधन को लेकर सागर में किसानों को किया गया जागरूक: पर्यावरण संरक्षण और लागत घटाने पर जोर !

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जिले में कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से नरवाई प्रबंधन को लेकर किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड बंडा की ग्राम पंचायत झागरी में कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किसानों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें नरवाई प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

किसानों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

बैठक में उपस्थित किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया गया। कृषि विस्तार अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नरवाई जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचती है।

उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश नष्ट हो जाते हैं, जिससे अगली फसल की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, धुआं और प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक साबित होता है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव

नरवाई जलाने से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। इससे वायु गुणवत्ता खराब होती है और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

कृषि अधिकारी ने किसानों को समझाया कि यदि वे नरवाई को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें, तो वे न केवल पर्यावरण को बचा सकते हैं, बल्कि अपनी खेती की लागत भी कम कर सकते हैं।

वैज्ञानिक कृषि यंत्रों के उपयोग पर जोर

बैठक में किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें रोटावेटर, सुपरसीडर, हैप्पी सीडर और डिस्क हैरो जैसे उपकरण शामिल हैं।

इन यंत्रों की मदद से खेत में बची हुई फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाया जा सकता है, जिससे वह प्राकृतिक खाद का काम करते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है।

कृषि लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि

विशेषज्ञों ने बताया कि नरवाई प्रबंधन के सही तरीकों को अपनाने से किसानों की उत्पादन लागत में कमी आती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। यह दीर्घकालिक दृष्टि से किसानों के लिए लाभकारी है।

इसके साथ ही, सरकार द्वारा इन कृषि यंत्रों पर अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे किसान कम लागत में इन्हें प्राप्त कर सकते हैं।

किसानों की सहभागिता और प्रतिक्रिया

बैठक में किसानों ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाई और अपनी समस्याएं एवं जिज्ञासाएं अधिकारियों के सामने रखीं। कई किसानों ने नरवाई प्रबंधन के नए तरीकों को अपनाने में रुचि दिखाई और भविष्य में इन तकनीकों का उपयोग करने की बात कही।

जागरूकता अभियान का महत्व

इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास की दिशा में भी सकारात्मक कदम उठता है।

ग्राम पंचायत झागरी में आयोजित यह बैठक नरवाई प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि किसान इन सुझावों को अपनाते हैं, तो वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बना सकते हैं।

प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे ऐसे अभियान भविष्य में खेती के स्वरूप को बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित होंगे।

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