सागर जिले के ग्राम बड़कुआ के निवासी डॉ. अखिल तिवारी ने फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ‘डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’ (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त की है। यह उपाधि Maharaj Vinayak Global University (एमवीजीयू), जयपुर द्वारा प्रदान की गई। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा सागर जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है। यह सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।
डॉ. अखिल तिवारी ने अपना शोध कार्य फिजियोथेरेपी के एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय “COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के रोगियों में कार्यात्मक व्यायाम क्षमता पर श्वसन मांसपेशी स्ट्रेचिंग के साथ ब्रीदिंग एक्सरसाइज के प्रभाव का अध्ययन” पर किया। यह विषय आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि COPD जैसी गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है और लाखों लोग इससे प्रभावित हैं।
अपने शोध में डॉ. तिवारी ने यह अध्ययन किया कि श्वसन व्यायाम (Breathing Exercises) और श्वसन मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग तकनीक किस प्रकार COPD मरीजों की कार्यात्मक क्षमता (Functional Exercise Capacity) को बेहतर बना सकती है। उन्होंने पाया कि नियमित और वैज्ञानिक तरीके से किए गए श्वसन व्यायाम न केवल मरीजों की सांस लेने की क्षमता को सुधारते हैं, बल्कि उनकी शारीरिक सहनशक्ति और दैनिक जीवन की गतिविधियों को भी आसान बनाते हैं। उनका यह शोध फिजियोथेरेपी और पुनर्वास चिकित्सा के क्षेत्र में उपयोगी और प्रभावी माना जा रहा है।

डॉ. तिवारी ने यह शोध कार्य विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी संकाय के अंतर्गत पूर्ण किया, जहां उन्हें अनुभवी शोध निर्देशक (गाइड) का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनके शोध कार्य की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों और शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि चिकित्सा जगत के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।
डॉ. अखिल तिवारी का संबंध सागर जिले के एक साधारण परिवार से है। वे पंडित श्री रामेश्वर प्रसाद तिवारी के सुपुत्र हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण से यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर किया जाए, तो किसी भी परिस्थिति में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
वर्तमान में डॉ. तिवारी पुणे में वरिष्ठ भौतिक चिकित्सक (Senior Physiotherapist) के पद पर कार्यरत हैं। वे अपने कार्यक्षेत्र में मरीजों के उपचार और पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे पूर्व वे वर्ष 2024-2025 के दौरान सागर जिले के जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में भी सेवाएं दे चुके हैं। वहां उन्होंने दिव्यांगजनों के उपचार और पुनर्वास के लिए सराहनीय कार्य किया और कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया।
डॉ. तिवारी की इस उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनके माता-पिता, परिजन, मित्र और सहयोगी सभी उन्हें इस सफलता के लिए बधाई दे रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने भी इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पूरे सागर जिले के लिए गर्व की बात है।
अपनी सफलता पर डॉ. अखिल तिवारी ने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता के आशीर्वाद, गुरुजनों के मार्गदर्शन और उनकी खुद की कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने अपने शिक्षकों और गाइड का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं हो पाता।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि समाज के लिए कुछ सकारात्मक योगदान देना है। वे भविष्य में भी फिजियोथेरेपी और चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करते हुए जरूरतमंद लोगों की सहायता करना चाहते हैं। खासकर वे उन मरीजों के लिए काम करना चाहते हैं जो शारीरिक रूप से कमजोर या दिव्यांग हैं और जिन्हें पुनर्वास की आवश्यकता है।
डॉ. अखिल तिवारी की यह सफलता आज के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश देती है कि शिक्षा, समर्पण और मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि छोटे गांवों से निकलकर भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है।
सागर जिले के लिए यह उपलब्धि गर्व का विषय है और उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में भी डॉ. तिवारी अपने कार्यों से जिले और देश का नाम रोशन करते रहेंगे।