मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित राजा हिरदे शाह लोधी शौर्य यात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण को लेकर तीखा और स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक बराबरी के लिए आरक्षण जरूरी है और जब तक वास्तविक समानता नहीं आती, तब तक इसे खत्म नहीं किया जा सकता।
“बड़े पदों के लोग जब सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे…”
अपने संबोधन में उमा भारती ने कहा—
“जब तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस के परिवार के लोग एक साथ सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता।”
उन्होंने यह बयान सामाजिक असमानता को रेखांकित करते हुए दिया और कहा कि समाज में बराबरी केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखनी चाहिए।

जातिगत असमानता पर जोर
उमा भारती ने कहा कि भारतीय समाज लंबे समय तक जातिगत आधार पर बंटा रहा है और आर्थिक विषमता आज भी बनी हुई है। ऐसे में आरक्षण उस असंतुलन को दूर करने का एक प्रभावी साधन है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ कानून बना देने से समानता नहीं आती, बल्कि समाज के व्यवहार में बदलाव जरूरी है।
शिवराज के बयानशिवराज के पुराने बयान का भी जिक्र
आरक्षण के मुद्दे पर 2016 में दिए गए बयान का भी जिक्र हुआ, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था—
“हमारे रहते हुए कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता।”
इस बयान के बाद प्रदेश में सवर्ण समाज में नाराजगी देखी गई थी और कई संगठन सक्रिय हुए थे।
2018 चुनाव पर असर की चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना रहा कि इस तरह के बयानों का असर 2018 के विधानसभा चुनाव पर पड़ा था। भाजपा को उस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, और कुछ नेताओं ने इसे बयानबाजी से जोड़कर भी देखा।

“तीसरी आजादी” का आह्वान
उमा भारती ने अपने भाषण में कहा कि देश ने पहली आजादी अंग्रेजों से पाई, लेकिन अब “तीसरी आजादी” समानता के अधिकार के लिए लड़नी चाहिए।
उन्होंने भारतीय संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां प्रकृति और जीव-जंतुओं तक में भेदभाव नहीं किया जाता, तो समाज में भी भेदभाव खत्म होना चाहिए।
सीएम मोहन यादव का ऐलान
कार्यक्रम में मौजूद मोहन यादव ने कहा कि राजा हिरदे शाह लोधी के जीवन और संघर्ष को शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। साथ ही उनके योगदान पर शोध भी कराया जाएगा।
प्रीतम लोधी की राजनीतिक मांग
पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि देश में लोधी समाज की भागीदारी बढ़नी चाहिए और कम से कम एक लोधी मुख्यमंत्री होना चाहिए। उन्होंने युवाओं की दिशा पर भी चिंता जताई।

गर्मी में कार्यक्रम के दौरान घटना
कार्यक्रम के दौरान भीषण गर्मी का असर भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान उनका एक सुरक्षा अधिकारी (PSO) अचानक मंच पर ही गिर पड़ा, जिसे तुरंत संभाल लिया गया।
भोपाल में उमा भारती का यह बयान आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे को फिर से केंद्र में ले आया है। उन्होंने जहां सामाजिक बराबरी के लिए आरक्षण की जरूरत पर जोर दिया, वहीं समाज में व्यवहारिक बदलाव की भी आवश्यकता बताई।
यह बयान आने वाले समय में प्रदेश और देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।