छतरपुर जिले के बकस्वाहा में मंगलवार को आस्था, समर्पण और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भीषण गर्मी और करीब 45 डिग्री तापमान के बीच बंसल समाज के लोगों ने भगवान हनुमान जी के प्रति अटूट विश्वास का परिचय देते हुए 51 मीटर लंबी ध्वजा के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली।
तपती धूप, झुलसाती हवाएं और गर्म सड़कें—इन सबके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। नंगे पांव करीब 2 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर उन्होंने अपनी भक्ति का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
25 साल पुरानी परंपरा, हर साल बढ़ती भव्यता
यह ध्वजा यात्रा कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि पिछले लगभग 25 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। हर वर्ष इसमें भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और आयोजन की भव्यता बढ़ती जा रही है।
बंसल समाज के लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक है। वे इसे पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ निभाते हैं।

नंगे पांव आस्था की यात्रा
दोपहर करीब 2 बजे वार्ड क्रमांक 14-15 से शुरू हुई यह यात्रा शाम करीब 5 बजे बड़े हनुमान मंदिर पहुंची। इस दौरान श्रद्धालु तपती सड़कों पर नंगे पांव चलते रहे।
गर्मी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सामान्य परिस्थितियों में कुछ मिनट भी खड़े रहना मुश्किल हो सकता है, लेकिन श्रद्धालुओं ने बिना किसी शिकायत के पूरे मार्ग को पार किया। यह दृश्य दर्शाता है कि जब आस्था गहरी होती है, तो शारीरिक कष्ट भी महत्वहीन हो जाते हैं।
भक्ति में डूबी शोभायात्रा
यात्रा के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। पुरुषों की टोलियां भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ती रहीं, वहीं महिलाओं और बालिकाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा को आध्यात्मिक रंग दिया।
सबसे आकर्षक दृश्य वह रहा, जब श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से सजी-धजी बग्गी को खींचा। इसमें भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया था।
100 से अधिक गांवों की भागीदारी
इस आयोजन में छतरपुर जिले के 100 से अधिक गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने पूरे बकस्वाहा क्षेत्र को एक धार्मिक मेले में बदल दिया।
गांव-गांव से आए लोग एक ही उद्देश्य के साथ जुटे थे—भगवान हनुमान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करना। यह सामूहिक श्रद्धा और एकता का भी प्रतीक बना।

मंदिर में ध्वजा अर्पण के साथ समापन
शोभायात्रा का समापन बड़े हनुमान मंदिर में हुआ, जहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद 51 मीटर लंबी ध्वजा को मंदिर में अर्पित किया गया।
ध्वजा अर्पण का यह क्षण अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक था। श्रद्धालुओं ने एक साथ जयकारे लगाए और पूरे वातावरण को भक्ति से सराबोर कर दिया।
आस्था की शक्ति का संदेश
बंसल समाज के सदस्यों का कहना है कि यह आयोजन किसी प्रदर्शन या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि उनकी आस्था और परंपरा का हिस्सा है। उनका मानना है कि सच्ची भक्ति में अपार शक्ति होती है, जो हर कठिनाई को आसान बना देती है।
45 डिग्री की भीषण गर्मी में नंगे पांव 2 किलोमीटर चलना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन श्रद्धालुओं ने इसे सहजता से पूरा कर यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे हर चुनौती छोटी पड़ जाती है।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
इस तरह के आयोजन केवल धार्मिक नहीं होते, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होते हैं। यह लोगों को जोड़ते हैं, परंपराओं को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराते हैं।
साथ ही, ऐसे आयोजन समाज में एकता, सहयोग और सामूहिकता की भावना को भी मजबूत करते हैं।
बकस्वाहा की यह ध्वजा यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। 45°C की तपती गर्मी में नंगे पांव यात्रा कर श्रद्धालुओं ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा किसी भी कठिनाई से बड़ी होती है।
यह आयोजन न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो यह बताता है कि जब विश्वास मजबूत हो, तो हर बाधा अपने आप छोटी हो जाती है।