भोपाल में अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन: वादाखिलाफी का आरोप, मांगें नहीं मानी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी !

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भोपाल में बुधवार को प्रदेशभर से आए हजारों अतिथि शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

चुनावी वादों को लेकर नाराजगी

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने अतिथि शिक्षकों के हित में कई वादे किए थे। इनमें गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करना, सीधी भर्ती में बोनस अंक देना और वार्षिक अनुबंध के माध्यम से रोजगार की स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल था।

लेकिन अब तक इन वादों पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ है, जिससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है।

बड़े नेताओं के आश्वासन भी अधूरे

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुराने आश्वासनों का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि इन नेताओं ने भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

रोजगार पर मंडरा रहा संकट

संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि वार्षिक अनुबंध लागू नहीं किया गया, तो 30 अप्रैल के बाद करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के बेरोजगार होने का खतरा है।

वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने कहा कि सरकार अपने वादे से पीछे हट रही है, जिससे शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है।

भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल

प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी समस्याओं को उठाया। उन्होंने बताया कि कई बार तकनीकी गड़बड़ी के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है।

वहीं, बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2008 से कार्यरत शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।

प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी करते हैं, इसलिए उनके अनुभव को उचित महत्व मिलना चाहिए।

क्या हैं मुख्य मांगें

अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • नियमितीकरण के लिए विशेष पात्रता परीक्षा और कम से कम 30% पद आरक्षित किए जाएं
  • शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए निर्धारित हों
  • हर वर्ष बोनस अंक और पात्रता अंकों में छूट दी जाए
  • स्कोर कार्ड में अनुभव के आधार पर अधिक अंक जोड़े जाएं
  • 12 माह का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए
  • बीमा, पीएफ और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
  • ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार और लंबित भुगतान किया जाए

तेज धूप में भी डटे रहे शिक्षक

प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक धरना स्थल पर मौजूद रहे। महिला शिक्षकों की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली, कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं।

यह दृश्य इस बात का संकेत था कि मुद्दा केवल नौकरी का नहीं, बल्कि भविष्य और परिवार की सुरक्षा से भी जुड़ा है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।

शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब धैर्य जवाब दे रहा है।

भोपाल में हुआ यह प्रदर्शन प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बड़े वर्ग की असंतुष्टि को उजागर करता है। अतिथि शिक्षक वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन स्थायित्व और सुविधाओं के अभाव में उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन को किस तरह लेती है—संवाद और समाधान के रास्ते पर बढ़ती है या स्थिति को और गंभीर होने देती है।

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