उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक नई और सुविधाजनक व्यवस्था शुरू होने जा रही है। अब मंदिर के अन्नक्षेत्र में दान की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है, जिससे भक्त घर बैठे ही सेवा से जुड़ सकेंगे और भगवान महाकाल की भोग आरती में शामिल होने का विशेष अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह नई सुविधा संभवतः अगले सोमवार से लागू कर दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को अन्न सेवा से जोड़ना और उन्हें एक बेहतर आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है।
मंदिर समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने जानकारी दी कि अन्नक्षेत्र पूरी तरह दान पर आधारित है। यहां प्रतिदिन करीब 9 हजार श्रद्धालु दो अलग-अलग समय में भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दान प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है।

अब श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन दान कर सकेंगे। इस सुविधा के तहत दान की अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं—दोनों समय की भोजन प्रसादी के लिए 1 लाख 10 हजार रुपए, एक समय के लिए 51 हजार रुपए और मीठे प्रसाद के लिए 21 हजार रुपए निर्धारित किए गए हैं।
नई व्यवस्था की खास बात यह है कि श्रद्धालु अब साल के किसी भी दिन के लिए पहले से बुकिंग कर सकेंगे। चाहे जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह या कोई अन्य विशेष अवसर—भक्त अपनी इच्छानुसार तारीख चुनकर उस दिन अन्न सेवा का लाभ ले सकते हैं।
दानदाताओं के लिए एक और विशेष सुविधा जोड़ी गई है। जो श्रद्धालु दान करेंगे, उन्हें भोग आरती के दौरान मंदिर के अंदर ले जाया जाएगा और उनके हाथों से भगवान महाकाल को भोग अर्पित कराया जाएगा। यह अवसर भक्तों के लिए एक अत्यंत भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव माना जा रहा है।
भगवान महाकालेश्वर को प्रतिदिन सुबह करीब 10 बजे भोग अर्पित किया जाता है। इस दौरान भोग आरती भी होती है। भोग की थाली में गेहूं की रोटी, दाल-चावल और दो प्रकार की सब्जियां शामिल रहती हैं। कई बार श्रद्धालु अपनी ओर से मिठाई भी अर्पित करते हैं, जिसे भोग में सम्मिलित कर लिया जाता है।

भोग अर्पण और आरती के बाद यही भोजन अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में सेवा, भक्ति और सामूहिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
मंदिर समिति का मानना है कि ऑनलाइन दान की यह पहल श्रद्धालुओं के लिए न केवल सुविधाजनक होगी, बल्कि इससे अधिक लोग अन्न सेवा से जुड़ सकेंगे। डिजिटल माध्यम से पारदर्शिता भी बढ़ेगी और दान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था परंपरा और आधुनिक तकनीक का एक सुंदर मेल है, जो श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल से जुड़ने का एक नया और सहज माध्यम प्रदान करेगी।