टीकमगढ़। बुंदेलखंड क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व विधायक स्वामी प्रसाद पस्तोर का 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बुधवार को लिधौरा नगर परिषद क्षेत्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे जिले सहित बुंदेलखंड क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शाम को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और आम नागरिक शामिल हुए। पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी गई, जो उनके सम्मान और योगदान को दर्शाता है।

स्वामी प्रसाद पस्तोर का जीवन बहुमुखी प्रतिभा और समाज सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। वे न केवल एक सफल राजनेता थे, बल्कि एक संवेदनशील पत्रकार, व्यंग्यकार और समाजसेवी भी थे। उन्होंने वर्ष 1980 में जतारा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया था। 1980 से 1985 तक उन्होंने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए जनहित के कई कार्य किए और आम जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
राजनीति के अलावा स्वामी प्रसाद पस्तोर का पत्रकारिता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे ‘ओरछा टाइम्स’ और ‘अर्थबोध’ जैसे समाचार पत्रों के संपादक रहे और लंबे समय तक जिला श्रमजीवी पत्रकार संघ से जुड़े रहे। उनके लेखन में सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक मिलती थी। वे अपने व्यंग्य लेखों और सशक्त अभिव्यक्ति के लिए भी जाने जाते थे। उनके छोटे भाई रघुवीर सहाय पस्तोर जिला श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष हैं, जिससे यह परिवार पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहा है।

स्वामी प्रसाद पस्तोर ने लगभग 25 वर्षों तक भूमि विकास बैंक के चेयरमैन के रूप में कार्य किया और किसानों तथा ग्रामीणों के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। इसके साथ ही वे एपेक्स बैंक के संचालक भी रहे। उनकी कार्यशैली हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी पर आधारित रही, जिसके कारण उन्हें समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था।
जब जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं, उस समय उन्होंने एक होम्योपैथिक डॉक्टर के रूप में भी लोगों की सेवा की। जरूरतमंदों का निःस्वार्थ इलाज कर उन्होंने समाज में एक अलग पहचान बनाई। उनका मानना था कि समाज सेवा ही सच्ची सेवा है, और उन्होंने इसे अपने जीवन में पूरी तरह आत्मसात किया।
उनके निधन पर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। जतारा विधायक हरिशंकर खटीक ने उन्हें “कलम का योद्धा” बताते हुए कहा कि वे एक शानदार वक्ता और सच्चे जनसेवक थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। पूर्व विधायक राकेश गिरी ने कहा कि स्वामी प्रसाद पस्तोर के रूप में जिले ने एक ईमानदार और समर्पित नेता को खो दिया है।
वहीं, टीकमगढ़ विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से जिले में स्वच्छ और स्वस्थ राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद पस्तोर ने अपने जीवन में जिस तरह से जनसेवा और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

बुधवार शाम को उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया गया। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की आंखें नम थीं और हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था। समाज के हर वर्ग के लोगों ने उन्हें याद करते हुए उनके योगदान को सराहा।
स्वामी प्रसाद पस्तोर का जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक व्यक्ति अपने समर्पण, ईमानदारी और सेवा भावना से समाज में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से न केवल राजनीति में, बल्कि पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ी है।

उनके निधन से टीकमगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिसकी भरपाई करना मुश्किल होगा। उनके विचार, उनके कार्य और उनकी सेवाएं हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।