मध्य प्रदेश के उज्जैन से सामने आई जानकारी के अनुसार इस वर्ष हिंदू पंचांग में एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। करीब 8 साल बाद ज्येष्ठ माह में अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का आगमन हो रहा है, जो 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इस पूरे अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी, जबकि धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को विशेष महत्व दिया जाएगा।
क्या होता है अधिकमास?
ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला के अनुसार हिंदू पंचांग की गणना विक्रम संवत पर आधारित होती है और वर्तमान में विक्रम संवत 2082 चल रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकमास तब बनता है जब पूरे चंद्र मास के दौरान सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता। इस खगोलीय असंतुलन को ठीक करने के लिए हर 2 से 3 वर्ष में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

मांगलिक कार्यों पर क्यों लगती है रोक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास को सांसारिक या भौतिक कार्यों की बजाय आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। इसी कारण इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसे आत्मचिंतन, साधना और ईश्वर भक्ति के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है।
क्या करें इस दौरान?
धर्माचार्यों के अनुसार इस पूरे माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को जप-तप, व्रत, दान-पुण्य, सत्संग, कथा-कीर्तन और तीर्थ यात्रा जैसे कार्यों में शामिल होना चाहिए। उज्जैन में विशेष रूप से महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना और शिप्रा नदी में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।
ज्येष्ठ अधिकमास का महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ज्येष्ठ माह पहले से ही प्रभावशाली माना जाता है और इसमें अधिकमास का पड़ना इसे और भी विशेष बना देता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना अधिक मिलता है। इससे पहले 1988, 1999, 2007 और 2018 में भी ज्येष्ठ अधिकमास पड़ा था।
इस अवधि में बनेंगे कई शुभ योग
अधिकमास के दौरान कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योग भी बनेंगे, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग और रवि योग जैसे शुभ संयोग शामिल हैं।
- 18 मई: सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग
- 21 मई: गुरु पुष्य योग
- 27 मई: अधिकमास एकादशी
- 11 जून: कमला एकादशी
- 14 जून: पितृ अमावस्या
- 15 जून: सोमवती अमावस्या (अधिकमास समापन)
ग्रहों के परिवर्तन का प्रभाव
इस दौरान कई ग्रहों का नक्षत्र और राशि परिवर्तन भी होगा, जो ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। 1 जून को गुरु का कर्क राशि में प्रवेश, 8 जून को सूर्य का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश और अन्य ग्रहों की स्थिति में बदलाव इस अवधि को और भी खास बना देंगे।
कितने दिन रहेगा अधिकमास?
इस वर्ष अधिकमास कुल लगभग 29 दिनों का रहेगा। 17 मई से इसकी शुरुआत होगी और 15 जून को इसका समापन होगा। वहीं, ज्येष्ठ माह का कुल काल 22 मई से 29 जून तक लगभग 58-59 दिनों का रहेगा, जो सामान्य से अधिक लंबा होगा।
आस्था और साधना का पर्व
धर्माचार्यों का मानना है कि अधिकमास केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर है। इस दौरान लोग अपने जीवन की गलतियों का चिंतन कर सुधार की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। इसे भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु) को समर्पित महीना माना गया है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
अंततः, यह समय भौतिक इच्छाओं को विराम देकर आध्यात्मिक मार्ग अपनाने का संदेश देता है। श्रद्धालु इस अवसर का लाभ उठाकर धार्मिक कार्यों में भाग लें और पुण्य अर्जित करें।