ग्रामीण विकास कार्यों का जायजा लेने मैदान में उतरे अधिकारी: जिला पंचायत सीईओ ने पंचायत भवन, खेत तालाब और दुग्ध इकाई का किया निरीक्षण !

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सागर जिले में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत जानने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री विवेक के. वी. ने केसली विकासखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सीईओ सबसे पहले ग्राम पंचायत मरामाधो पहुंचे, जहां उन्होंने पंचायत भवन का अवलोकन किया। उन्होंने भवन की स्थिति, उपयोगिता और वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पंचायत भवन केवल एक प्रशासनिक ढांचा नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की गतिविधियों का केंद्र होता है, इसलिए इसे व्यवस्थित और सक्रिय बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर संचालित योजनाओं की जानकारी आमजन तक पारदर्शिता के साथ पहुंचाई जाए।

इसके बाद उन्होंने खेत तालाब का निरीक्षण किया। खेत तालाब योजना के तहत बनाए गए इस जलस्रोत की स्थिति और उपयोगिता का उन्होंने बारीकी से परीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तालाबों का संरक्षण और नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की योजनाएं किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

सीईओ विवेक के. वी. ने कहा कि खेत तालाब न केवल सिंचाई के लिए उपयोगी हैं, बल्कि यह भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मददगार होते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे जल संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। साथ ही, किसानों को भी इन संरचनाओं के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि वे इनका सही उपयोग कर सकें।

निरीक्षण के अगले चरण में उन्होंने ग्राम घाना का दौरा किया, जहां देवश्री फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा संचालित दुग्ध पैकेजिंग इकाई का अवलोकन किया। इस इकाई में दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की पूरी प्रक्रिया का उन्होंने निरीक्षण किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की इकाइयां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ना और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। दुग्ध पैकेजिंग इकाई जैसे प्रयास न केवल रोजगार के अवसर पैदा करते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रकार की इकाइयों को तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि उनका संचालन सुचारु रूप से होता रहे।

इस दौरान श्री प्रभाष मुड़ोतिया सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सीईओ को विभिन्न योजनाओं की प्रगति और चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। सीईओ ने स्पष्ट किया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, ताकि उसका लाभ सीधे आमजन तक पहुंच सके।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण विकास केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट करें और योजनाओं की निगरानी करें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

समग्र रूप से यह निरीक्षण दौरा प्रशासन की उस सक्रियता को दर्शाता है, जिसमें विकास कार्यों को लेकर गंभीरता दिखाई दे रही है। पंचायत भवनों की व्यवस्था, जल संरक्षण के प्रयास और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने जैसी पहलें यह संकेत देती हैं कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

इस तरह के निरीक्षण न केवल अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हैं, बल्कि ग्रामीणों में भी विश्वास पैदा करते हैं कि उनकी समस्याओं और जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में यदि इसी तरह योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो निश्चित ही सागर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर देखने को मिलेगी।

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