बीना,
बीना क्षेत्र में इस वर्ष बड़े पैमाने पर की गई ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती अब गंभीर संकट का सामना कर रही है। करीब 28 हजार हेक्टेयर में बोई गई इस फसल पर मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का सीधा असर देखने को मिल रहा है। दिन में तेज गर्मी और शाम को बादल छाने व हल्की बूंदाबांदी जैसी स्थिति के कारण कीट और रोग तेजी से फैल रहे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
कट वर्म और पोड बोरर का बढ़ता प्रकोप
किसानों के अनुसार, खेतों में कट वर्म और पोड बोरर (इल्लियों) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कट वर्म इल्लियां पत्तियों को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि पोड बोरर फलियों और बीजों को खाकर सीधे उत्पादन पर असर डाल रही हैं। इससे फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों प्रभावित हो रही हैं।

फफूंदजनित रोगों ने बढ़ाई परेशानी
केवल कीट ही नहीं, बल्कि फफूंदजनित रोग भी मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसान संदीप लहरिया ने बताया कि कई खेतों में पौधे पीले पड़ने लगे हैं और धीरे-धीरे सूख रहे हैं। यह संकेत है कि फसल गंभीर रोगों की चपेट में है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है।
बार-बार छिड़काव, लेकिन असर नहीं
फसल को बचाने के लिए किसान लगातार प्रयास कर रहे हैं। इल्लियों और अन्य कीटों से बचाव के लिए अलग-अलग कीटनाशकों का दो से तीन बार छिड़काव किया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि कीटनाशक अब पहले जितने प्रभावी नहीं रह गए हैं, जिससे कीटों पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया है।

बढ़ता खर्च, घटती उम्मीद
एक किसान के अनुसार, कीटनाशक छिड़काव में प्रति एकड़ लगभग 2000 रुपए तक का खर्च आ रहा है। इसके बावजूद जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे, तो किसानों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है। फसल के पीले पड़ने और खराब होने से उत्पादन घटने की आशंका ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
मौसम की अनिश्चितता बनी मुख्य वजह
इस वर्ष सरकार द्वारा प्रोत्साहन और बोनस की घोषणा के चलते किसानों ने उड़द के बजाय मूंग की खेती को प्राथमिकता दी थी, क्योंकि यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है। लेकिन मौसम की अनिश्चितता—तेज गर्मी, नमी और हल्की बारिश—ने कीट और रोगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर दिया है, जिससे फसल पर खतरा मंडरा रहा है।
विशेषज्ञ सलाह की जरूरत
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने की जरूरत है। केवल रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर रहने के बजाय जैविक उपाय, समय पर निगरानी और संतुलित दवाओं का उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है। साथ ही, कृषि विभाग को भी फील्ड में सक्रिय होकर किसानों को सही मार्गदर्शन देना चाहिए।बीना क्षेत्र में मूंग की फसल पर बढ़ता कीट और रोग प्रकोप किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो उत्पादन में भारी गिरावट हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और कृषि विभाग की सक्रियता और किसानों को समय पर सही सलाह देना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि उनकी मेहनत और निवेश सुरक्षित रह सके।