सागर। उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल के निर्देशों के परिपालन में शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय, सागर में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और मानसिक सुदृढ़ता को ध्यान में रखते हुए “प्रेरणा एवं लक्ष्य निर्धारण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के निर्देशन में संपन्न हुआ, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. गोपा जैन ने की।
परीक्षाओं के नजदीक आते ही विद्यार्थियों में तनाव और चिंता का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे समय में इस प्रकार की कार्यशालाएं न केवल उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास भी पैदा करती हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस कार्यशाला में छात्रों को परीक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और अपने लक्ष्य स्पष्ट करने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. गोपा जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए एकाग्रता और सही निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से निर्धारित कर लें और उसी दिशा में निरंतर प्रयास करें, तो सफलता निश्चित रूप से उनके कदम चूमेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, अनुशासन और आत्मविश्वास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ. रामकुमार तिवारी ने विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि मानसिक संतुलन, धैर्य और आत्मविश्वास भी उतने ही आवश्यक हैं। उन्होंने छात्रों को समझाया कि कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय संयम बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है।
डॉ. तिवारी ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह भी बताया कि स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण किस प्रकार उनकी ऊर्जा को सही दिशा में केंद्रित करता है। उन्होंने कहा कि जब छात्र अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट होते हैं, तो उनके प्रयास स्वतः ही संगठित और प्रभावी हो जाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी सलाह दी कि वे अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें और निरंतर अभ्यास के माध्यम से अपनी कमजोरियों को दूर करें।
कार्यक्रम के सफल संचालन में संयोजक सुनील प्रजापति के साथ-साथ वरिष्ठ सदस्य डॉ. रविंद्र सिंह ठाकुर और श्रीमती रश्मि दुबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए यह सुनिश्चित किया कि विद्यार्थियों को अधिकतम लाभ मिल सके।

स्नातक परीक्षाओं के ठीक पूर्व आयोजित इस कार्यशाला को लेकर छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों ने न केवल वक्ताओं के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना, बल्कि उनसे प्रेरणा भी ली। इस दौरान विद्यार्थियों ने परीक्षा के तनाव को कम करने, समय का बेहतर उपयोग करने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को समझा।
महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. संदीप सबलोक ने बताया कि प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रकार के प्रेरणादायी सत्र विद्यार्थियों के प्रदर्शन में गुणात्मक सुधार लाने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा के समय इस तरह के आयोजन छात्रों को मानसिक रूप से सशक्त बनाते हैं और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस कार्यशाला ने यह साबित कर दिया कि यदि विद्यार्थियों को सही समय पर उचित मार्गदर्शन और प्रेरणा मिले, तो वे न केवल अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का स्रोत बना, जो आने वाली परीक्षाओं में उनके बेहतर प्रदर्शन में सहायक सिद्ध होगा।