भोपाल। राजधानी के आदमपुर कचरा खंती में बार-बार आग लगने की घटनाओं को लेकर आज Supreme Court of India में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में भोपाल नगर निगम के अधिकारी अपना पक्ष रखेंगे। इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को पूरे देश में लागू करने की बात कही थी, जिस पर आज फिर दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
यह पूरा मामला पहले National Green Tribunal से जुड़ा रहा है। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में आदमपुर खंती में बार-बार आग लगने और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर याचिका दायर की थी। इसके बाद 31 जुलाई 2023 को एनजीटी ने भोपाल नगर निगम पर 1.80 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां यह मामला लगातार सुनवाई में बना हुआ है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे देश में सख्ती से लागू किए जाने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि वर्तमान पीढ़ी अब और इंतजार नहीं कर सकती और कचरे के वैज्ञानिक निपटान, भूजल और वायु प्रदूषण रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से नियमों का पालन जरूरी है।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने बताया था कि देश में प्रतिदिन करीब 1.70 लाख टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। हालांकि कई शहरों में कचरा संग्रहण में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की स्थिति अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बिना प्रोसेस किया गया कचरा अक्सर खुले डंप साइट या पुराने लैंडफिल में जमा हो जाता है, जिससे पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ता है।
भोपाल के संदर्भ में कोर्ट ने यह भी कहा था कि आदमपुर छावनी डंप साइट पर जमा पुराने कचरे के निपटारे के लिए जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने और टेंडर फाइनल करने के लिए नगर निगम को अतिरिक्त समय दिया गया था। अब इस पर प्रगति की स्थिति भी कोर्ट के सामने रखी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक भोपाल शहर से हर दिन करीब 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से लगभग 800 टन कचरा खंती तक पहुंचता है। इसमें से करीब 290 टन कचरा मिट्टी में परिवर्तित हो जाता है, जबकि 510 टन मिश्रित कचरा बचता है। नगर निगम की मौजूदा प्रोसेसिंग क्षमता 420 टन ही है, जिससे बड़ी मात्रा में कचरा बिना प्रोसेस के जमा होता जा रहा है।

स्थिति को और गंभीर बनाते हुए हाल ही में तीन दिन पहले भी खंती में आग लग गई थी। खास बात यह रही कि एक दिन पहले ही लिगेसी वेस्ट के निपटारे के काम की शुरुआत के लिए पूजा की गई थी, लेकिन इसके अगले ही दिन कचरे में आग भड़क उठी। इस आग से आसपास के क्षेत्रों में धुआं फैल गया और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
आदमपुर खंती में इस समय करीब 6.5 से 7.5 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट जमा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने 26 मार्च को Saurashtra Enviro Private Limited को इसके निपटारे का कार्य सौंपा है, जिसके लिए लगभग 55 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा।
अब सभी की नजरें आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि भोपाल में कचरा प्रबंधन की स्थिति सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और नगर निगम पर क्या जिम्मेदारियां तय की जाती हैं।