भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए मंगलवार का दिन बेहद अहम रहा, जब मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश के व्यापार, कृषि, उद्योग, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका असर आने वाले समय में राज्य की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करेगा।
सबसे अहम निर्णय राज्य में व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन को लेकर लिया गया। यह बोर्ड राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड की तर्ज पर बनाया जाएगा, जिसका उद्देश्य प्रदेश के व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करना, उन्हें सुरक्षा देना और व्यापार को संगठित व मजबूत बनाना है। इस बोर्ड के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होंगे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस पहल को उच्च प्राथमिकता दे रही है।
इस बोर्ड में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ अशासकीय सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि व्यापार जगत की वास्तविक समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा जिला स्तर पर भी समितियों का गठन किया जाएगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों को सीधे लाभ मिल सके और निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके।

कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री Chetan Kashyap ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए ₹2442 करोड़ के बड़े मिशन को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत किसानों को बेहतर बीज, तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे प्रदेश में दालों का उत्पादन बढ़े और आयात पर निर्भरता कम हो।
इसके साथ ही ₹38,555 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों को भी मंजूरी दी गई है। इन कार्यों में सड़क, पुल, ग्रामीण विकास, शहरी अधोसंरचना और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। यह निर्णय प्रदेश के समग्र विकास को गति देने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भोपाल के समीप एक इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित करने का फैसला भी लिया है। इस क्लस्टर के माध्यम से राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हाल ही में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली सफलता पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। यह राजनीतिक संदर्भ भी बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, जहां सरकार ने अपनी उपलब्धियों और संगठन की मजबूती को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रहे गेहूं उपार्जन अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 41 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है और इसके बदले किसानों को ₹6520 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि लगभग 14 लाख 70 हजार किसानों ने इस प्रक्रिया में पंजीयन कराया है, जो सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का संकेत है।
इसके अलावा इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन का भी उल्लेख किया गया। इस सम्मेलन में 26 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है, जिससे प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत सड़क और पुलों के संधारण कार्यों को जारी रखने की मंजूरी दी। इसके साथ ही एफ टाइप और उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों की मरम्मत योजनाओं को भी जारी रखा जाएगा। ग्रामीण सड़कों और जिला मार्गों के निर्माण एवं उन्नयन कार्यों को भी स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
सड़क सुरक्षा से संबंधित योजनाओं को 16वें वित्त आयोग के तहत जारी रखने का निर्णय भी लिया गया है। यह कदम सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना, आरसीबीसी और एनआईसी केंद्रों के संचालन को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क और सूचना प्रौद्योगिकी निवेश प्रोत्साहन योजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य योजना को जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही नए, निर्माणाधीन और अपूर्ण आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्यों को भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है। यह कदम बच्चों और महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अनुकूल वातावरण तैयार करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड और जिला स्तरीय समितियों के गठन का निर्णय लिया गया है। इससे प्रदेश के छोटे और मध्यम व्यापारियों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह कैबिनेट बैठक कई मायनों में दूरगामी प्रभाव डालने वाली रही। सरकार ने एक ओर जहां व्यापारियों को सशक्त करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर कृषि, उद्योग, अधोसंरचना और सामाजिक क्षेत्रों में भी व्यापक योजनाओं को मंजूरी दी है।
इन फैसलों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि मध्यप्रदेश सरकार राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, निवेश आकर्षित करने, रोजगार बढ़ाने और सामाजिक विकास को गति देने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले समय में इन निर्णयों का असर जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।