उपार्जन में अनियमितता पर सख्ती: बम्होरी समिति प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस !

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सागर। जिले में समर्थन मूल्य पर चल रहे उपार्जन कार्यों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देशानुसार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित बम्होरी (तहसील केसली) के प्रबंधक श्री सचेंद्र कुमार जैन को उपार्जन कार्य में पाई गई अनियमितताओं के चलते कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

यह कार्रवाई उस समय की गई जब कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने केसली क्षेत्र के भ्रमण के दौरान चना एवं मसूर उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान किसानों की उपज की तुलाई में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया गया। मौके पर बोरियों की पुनः तुलाई कराई गई, जिसमें चना और मसूर की मात्रा 50.720 किलोग्राम से 50.740 किलोग्राम तक पाई गई।

जबकि निर्धारित नियमों के अनुसार जूट बारदाने में अधिकतम 50.580 किलोग्राम तक ही तुलाई की अनुमति है। इस प्रकार प्रत्येक बोरी में लगभग 140 से 160 ग्राम तक अतिरिक्त तुलाई पाई गई, जो स्पष्ट रूप से निर्धारित मापदंडों का उल्लंघन है। इस प्रकार की अनियमितता को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की है।

उपसंचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में प्रबंधक से दो दिवस के भीतर स्पष्टिकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रस्तुत किया गया उत्तर संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो संबंधित समिति को उपार्जन कार्य से पृथक कर दिया जाएगा और उसे ब्लैकलिस्टेड श्रेणी में रखा जाएगा।

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने स्पष्ट किया है कि उपार्जन कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी उपार्जन केंद्रों पर तुलाई, भंडारण और भुगतान की प्रक्रियाओं की नियमित निगरानी की जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की मेहनत की उपज का सही मूल्य और उचित तौल मिलना उनका अधिकार है, और प्रशासन इस अधिकार की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह कार्रवाई प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल उपार्जन केंद्रों पर अनुशासन स्थापित होगा, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत होगा।

प्रशासन ने सभी उपार्जन केंद्रों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित मापदंडों का पालन करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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