मध्य प्रदेश के बीना रेलवे जंक्शन पर गुरुवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब बाल कल्याण समिति को सूचना मिली कि दरभंगा-अहमदाबाद अंत्योदय एक्सप्रेस में बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों को मजदूरी के लिए बिहार से गुजरात ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही रेलवे स्टेशन पर जीआरपी, आरपीएफ और सामाजिक संगठनों की संयुक्त टीम ने सघन जांच अभियान चलाया।
ट्रेन में मिले 100 से अधिक बच्चे
जानकारी के अनुसार ट्रेन नंबर 15559 दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस में 100 से ज्यादा बच्चे गुजरात की ओर जाते हुए पाए गए। आशंका जताई जा रही है कि इन बच्चों को विभिन्न कारखानों और उद्योगों में काम कराने के लिए ले जाया जा रहा था।

बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने बताया कि बच्चों को बिहार से गुजरात के कई शहरों में मजदूरी के उद्देश्य से भेजा जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सूचना पहले ही भारतीय रेलवे के जबलपुर और भोपाल मंडल अधिकारियों को दी गई थी। हालांकि, सागर स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव बेहद कम होने के कारण वहां कार्रवाई नहीं हो सकी।
बीना स्टेशन पर चला अभियान
जैसे ही ट्रेन बीना रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर पहुंची, टीम ने तत्काल ट्रेन में चढ़कर जांच शुरू कर दी। इस दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति राम कुमार दास को ट्रेन से नीचे उतारा गया।
पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह तीन नाबालिगों सहित कुल पांच बच्चों को रायसेन ले जा रहा था, जहां उन्हें एक कारखाने में काम पर लगाया जाना था।
हालांकि, बीना स्टेशन पर भी ट्रेन का ठहराव सीमित समय के लिए होने के कारण पूरी कार्रवाई नहीं हो पाई और ट्रेन आगे रवाना हो गई। इससे कई बच्चों को मौके पर नहीं उतारा जा सका।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
मध्यप्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओमकार सिंह ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- अंत्योदय एक्सप्रेस से लगातार बाल मजदूरों की तस्करी की शिकायतें मिलती रही हैं।
- पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के समुचित सहयोग के अभाव में कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पाती।
- पूर्व में भी इसी ट्रेन से बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाया गया था।
उन्होंने बताया कि पिछली बार समय पर कार्रवाई नहीं हो पाने के कारण बाद में 23 बच्चों को उज्जैन और 3 बच्चों को नागदा से बाल मजदूरी के चंगुल से मुक्त कराना पड़ा था।
बाल मजदूरी और मानव तस्करी का गंभीर मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सिर्फ बाल मजदूरी नहीं बल्कि मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की ओर भी इशारा करती हैं। गरीब परिवारों के बच्चों को नौकरी, कमाई या बेहतर भविष्य का झांसा देकर दूसरे राज्यों में भेजा जाता है, जहां उनसे खतरनाक परिस्थितियों में काम कराया जाता है।

कार्रवाई में कई संस्थाएं रहीं शामिल
इस पूरे अभियान में कई सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रमुख रूप से:
- ओमकार सिंह
- सीपी शुक्ला
- वंदना तोमर
- अनिल रैकवार
- भगवत शरण वनवारिया
- मालती पटेल
- नितिन सेन
- हरनाम सिंह
- प्रशांत सेन
- लक्ष्मी अवस्थी
- शिवम पाठक
- अधिवक्ता अभिषेक राय
- दीपेश मिश्रा
सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कानून क्या कहता है?
भारत में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मजदूरी कराना कानूनन अपराध है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 के तहत बाल मजदूरी कराने वालों पर सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
बीना रेलवे जंक्शन पर सामने आया यह मामला बाल मजदूरी और मानव तस्करी की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। सवाल यह भी है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चे ट्रेनों के जरिए दूसरे राज्यों तक कैसे पहुंच रहे हैं। अब जरूरत है कि रेलवे, पुलिस और बाल संरक्षण एजेंसियां मिलकर ऐसे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि मासूम बच्चों का भविष्य अंधेरे में न धकेला जाए।