कूनो से निकला चीता KGP-1 अब मुरैना सीमा में पहुंचा !

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मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KGP-1 लगातार अपनी लंबी मूवमेंट से वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। पिछले करीब 60 दिनों से ग्वालियर वन मंडल के तिघरा और घाटीगांव के जंगलों में सक्रिय रहने के बाद अब यह चीता मुरैना जिले की सीमा की ओर बढ़ गया है।

वन विभाग की टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार, चीते ने इंसानी गतिविधियों और शोरगुल से दूरी बनाए रखने के लिए आसन नदी पार कर नए जंगल क्षेत्र की ओर रुख किया है। फिलहाल उसकी लोकेशन मुरैना सीमा के आसपास ट्रैक की जा रही है।

प्राकृतिक गलियारों का कर रहा उपयोग

वन विभाग अधिकारियों का कहना है कि चीता KGP-1 लगातार प्राकृतिक गलियारों का उपयोग करते हुए आगे बढ़ रहा है। ग्वालियर के जंगलों में लंबे समय तक रहने के दौरान उसने वहां के पर्यावरण और शिकार की स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लिया था।

हालांकि, समय के साथ उसके मूवमेंट पैटर्न में बदलाव देखने को मिला। अधिकारियों के मुताबिक, पानी और शिकार की तलाश में उसने जंगलों के बीच बने प्राकृतिक रास्तों का उपयोग किया और अब वह नए क्षेत्र की ओर बढ़ गया है।

वन विभाग का मानना है कि यह चीते के प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है। जंगली जानवर अक्सर सुरक्षित और शांत वातावरण की तलाश में अपना क्षेत्र बदलते रहते हैं।

डेढ़ महीने तक ग्वालियर में रहा सक्रिय

पिछले डेढ़ से दो महीनों के दौरान चीता KGP-1 ग्वालियर वन मंडल के लिए लगातार चिंता और निगरानी का विषय बना रहा। तिघरा, घाटीगांव और आसपास के जंगलों में उसकी लगातार मौजूदगी दर्ज की गई।

इस दौरान वन विभाग की टीम दिन-रात उसकी गतिविधियों पर नजर रखती रही, ताकि वह आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करे और किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

चीते की मूवमेंट को देखते हुए कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई थी। ग्रामीणों से जंगल की ओर अनावश्यक आवाजाही न करने और अकेले जंगल क्षेत्रों में न जाने की अपील भी की गई थी।

जीपीएस कॉलर से हो रही निगरानी

वन विभाग ने चीते की निगरानी के लिए जीपीएस सैटेलाइट कॉलर का उपयोग किया है। इसी तकनीक की मदद से उसकी हर लोकेशन और मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, चीते की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही कारण है कि ग्वालियर और मुरैना वन मंडल की संयुक्त टीमें सीमावर्ती क्षेत्रों में अलर्ट पर रखी गई हैं।

वन अमला लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि चीता किसी आबादी वाले इलाके में न पहुंचे और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी स्थिति पैदा न हो।

ग्रामीणों में उत्सुकता और सतर्कता

चीते की लगातार मूवमेंट को लेकर ग्रामीण इलाकों में उत्सुकता भी बनी हुई है। कई जगह लोगों ने जंगलों में चीते की मौजूदगी के निशान देखने का दावा किया है। हालांकि वन विभाग लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे चीते के करीब जाने या उसे देखने की कोशिश न करें।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चीता सामान्य स्थिति में इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है। यदि उसे किसी प्रकार का खतरा महसूस नहीं होता, तो वह आबादी से दूर जंगलों में ही रहना पसंद करता है।

कूनो प्रोजेक्ट के लिए अहम है मूवमेंट

विशेषज्ञों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर चीते का दूसरे जंगल क्षेत्रों में जाना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि चीते प्राकृतिक आवास और गलियारों का उपयोग कर रहे हैं।

हालांकि, लंबे समय तक जंगलों से बाहर रहना और लगातार मूवमेंट करना वन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण भी होता है। ऐसे में निगरानी, सुरक्षा और स्थानीय लोगों की जागरूकता बेहद जरूरी हो जाती है।

वन विभाग पूरी तरह अलर्ट

मुरैना सीमा की ओर चीते के बढ़ने के बाद वन विभाग ने सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और बढ़ा दी है। गश्ती दलों को सक्रिय रखा गया है और चीते की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल चीता सुरक्षित है और सामान्य रूप से जंगल क्षेत्र में विचरण कर रहा है। वन विभाग की कोशिश है कि वह बिना किसी बाधा और मानव संपर्क के सुरक्षित रूप से अपने नए क्षेत्र में रह सके।

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