अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने दवाओं के दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ओबेदुल्लागंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि दवाओं के सेवन के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि समय रहते इनकी जानकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्य एजेंसियों तक पहुंचाई जाए, तो न केवल मरीजों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि भविष्य में अन्य लोगों की जान भी बचाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में दवाओं के साइड इफेक्ट एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल करीब 4 लाख लोगों की मौत दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव यानी एडवर्स ड्रग रिएक्शन (ADR) के कारण होती है। इनमें कई मामले ऐसे होते हैं, जिनमें समय पर पहचान और रिपोर्टिंग होने पर मरीज की जान बचाई जा सकती थी।

अभियान के दौरान डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने लोगों को समझाया कि दवा लेने के बाद यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी, शरीर पर चकत्ते, चक्कर आना, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या किसी भी प्रकार की असामान्य प्रतिक्रिया महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों को देने से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि कौन-सी दवा किस प्रकार का दुष्प्रभाव पैदा कर रही है।
विशेषज्ञों ने कहा कि आमतौर पर लोग दवाओं के साइड इफेक्ट को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार यही लक्षण गंभीर बीमारी या जानलेवा स्थिति का संकेत हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसी दवा के दुष्प्रभाव की रिपोर्टिंग होने पर वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ उस दवा की सुरक्षा का अध्ययन करते हैं। यदि जरूरत पड़ती है, तो दवा के उपयोग से जुड़े दिशा-निर्देश बदले जाते हैं या चेतावनी जारी की जाती है।
कार्यक्रम में फार्माकोविजिलेंस यानी दवाओं की सुरक्षा निगरानी प्रणाली के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आम नागरिकों द्वारा दी गई छोटी-छोटी जानकारियां भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-सी दवा किस आयु वर्ग या स्वास्थ्य स्थिति वाले मरीजों पर किस प्रकार असर डाल रही है। इस जानकारी के आधार पर भविष्य में मरीजों को होने वाले जोखिम को कम किया जा सकता है।

एम्स भोपाल की टीम ने लोगों को दवाओं के साइड इफेक्ट की शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया भी समझाई। मरीज या उनके परिजन टोल-फ्री नंबर 1800-180-3024 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल एप के माध्यम से भी दवाओं के दुष्प्रभाव की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाई जा सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए घर बैठे भी शिकायत दर्ज करना आसान हो गया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को यह भी बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना, पुराने प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग करना और इंटरनेट या अन्य स्रोतों से जानकारी लेकर खुद इलाज करना कई बार गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने मरीजों से अपील की कि किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें और उपचार के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखें।
विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं के दुष्प्रभावों की समय पर पहचान और रिपोर्टिंग से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है। एम्स भोपाल द्वारा चलाया गया यह जागरूकता अभियान लोगों में दवा सुरक्षा को लेकर समझ बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।